संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक मिशेल बैशलेट की हाल में हुई चीन यात्रा के बावजूद शिनजियांग के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय विवाद थमने की संभावना फिलहाल नहीं है। बैशलेट ने पिछले शनिवार को अपनी चीन यात्रा पूरी की, जिस दौरान वे कई दिन शिनजियांग प्रांत में रहीं।
बैशलेट के बयान पर चीनी मीडिया ने खुशी जताई। उसमें इस बात का जिक्र किया गया कि बैशलेट ने चीन में मानवाधिकार संरक्षण की स्थिति में हुए सुधार की बात खुल कर कही है। चीनी मीडिया ने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त को ‘वास्तविक शिनजियांग का प्रत्यक्ष अनुभव’ प्राप्त करने का मौका मिला। लेकिन अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने बैशलेट और उनकी टीम के निष्कर्षों को लेकर खुलेआम चिंताई है।
कूटनीति विशेषज्ञों का कहना है कि बैशलेट की यात्रा चीन और पश्चिमी देशों के बीच जारी टकराव की एक और झलक बन गई है। पश्चिमी देश लगातार उनके निष्कर्षों को संदेह से देख रहा हैं। इस यात्रा को इस बात का भी संकेत समझा जा रहा है कि अब संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी एजेंसियां भी पश्चिमी देशों और चीन के बीच बनी खाई को पाटने में नाकाम साबित हो रही हैं।
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन के आलोचकों को आशा थी कि बैशलेट उइघुर मुसलमानों से चीन के व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा करेंगी। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बदले उन्होंने चीन से संपर्क और संवाद बनाए रखने पर जोर दिया।
अब पश्चिमी विश्लेषकों ने कहा है कि बैशलेट को अपना यह वादा निभाना चाहिए कि वे मानवाधिकार हनन के मामलों की निगरानी जारी रखेंगी। इन विश्लेषकों के मुताबिक बैशलेट को इस बात की निगरानी करनी चाहिए कि आतंकवाद विरोधी नीतियों की समीक्षा के उनके सुझाव पर चीन क्या कदम उठाता है। उधर चीनी विश्लेषकों ने कहा है कि शिनजियांग में उइघुर मुसलमानों के जनसंहार या उनके लिए सामूहिक कारावास होने की बातें शुरू से निराधार थीं। संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त की यात्रा ने इस बात की पुष्टि दुनिया के सामने कर दी है।