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मंगल ग्रह पर 2117 तक पहला शहर बसाएगा यूएई

Fri, 17 Feb 2017 11:38 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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मंगल ग्रह - फोटो : Demo Pic
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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने 2117 तक लाल ग्रह ‘मंगल’ पर पहला शहर बसाने की योजना का खुलासा किया है। ऊर्जा समृद्ध देश अगले कुछ दशकों में लोगों को मंगल ग्रह पर ले जा सकता है।
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दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मख्तूम और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायह अल नाहयान ने ‘100 वर्षीय योजना’ की घोषणा की। इस योजना के लिए खाड़ी देश विशेष अंतरराष्ट्रीय संगठनों और वैज्ञानिक संगठनों का सहयोग लेगा। 

यूएई एक राष्ट्रीय कैडर बनाकर इस योजना पर काम करेगा जो वैज्ञानिक संसाधनों का प्रयोग कर अगले दशक तक लोगों को लाल ग्रह पर भेजने के परिवहन की व्यवस्था करेगा। 
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गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह घोषणा वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट के बाद की गई जहां 138 सरकारों के प्रतिनिधि और छह बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन के साथ ही अग्रणी अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कंपनियां मौजूद थीं।

शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मखतूम ने दुबई में इस सप्ताह मार्स 2117 प्रोजेक्ट की घोषणा की, जिसके लिए 100 साल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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जानिए कैसे काम करेगा UAE का ये मिशन

- फोटो : Gulf News
उन्होंने बताया, 'मंगल पर उतरना मानवों के लिए दीर्घकालीन सपना रहा है। हमारा लक्ष्य है कि यूएई अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व करते हुए इस सपने को सच कर दिखाए। नई परियोजन एक बीज है जिसे हमने आज रोपा है।'

क्या है मार्स 2117
‘100 वर्षीय योजना’ में ‘साइंटिफिक रिसर्च प्रोग्राम’ को शामिल किया जाएगा, जो राष्ट्रीय कार्यकर्ताओं को यूएई के विश्वविद्यालयों में अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में काम करने के लिए विशेष रुप से तैयार करेगा। इसके साथ ही यह प्रोग्राम युवा वर्ग को अंतरिक्ष के बारे में जानने के लिए उत्साहित भी करेगा।

कुछ ऐसे आगे बढ़ेगा मार्स 2117
अंतरिक्ष में दुबई का पहला अभियान 2021 में लॉन्च होना है। अगर इसमें सफलता मिलती है तो यह अंतरिक्ष में अरब का पहला अनुसंधान होगा। मार्स 2117 प्रोजेक्ट में अंतरराष्ट्रीय टीम को जोड़ने से यूएई के वैज्ञानिक काम करेंगे। आने वाले दशकों में यह अंतरिक्ष में गति बढ़ाने की दिशा में काम करेगा। शुरुआती अवधि में मंगल पर भोजन और ऊर्जा की संभावनाओं को ढूंढ़ने पर काम किया जाएगा। इसके साथ ही मंगल पर पहुंचने और वहां से आने के सबसे तेज माध्यम पर भी शोध किया जाएगा। 
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