अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य टकराव की आशंका के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है। यूएई के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश ने रविवार को कहा कि सैन्य कार्रवाई से मौजूदा संकट का समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि इससे क्षेत्र की स्थिति और जटिल हो सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कतर की मध्यस्थता में चल रही बातचीत से कोई कूटनीतिक रास्ता निकल सकता है और अमेरिका-ईरान के बीच टकराव का नया दौर टल सकता है।
क्या बोले अनवर गरगाश?
बहरीन की राजधानी मनामा में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन 'मनामा डायलॉग' में गरगाश ने कहा कि क्षेत्र और दुनिया के लिए यह साल एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाया था। इसके बाद से क्षेत्र में तनाव बना हुआ है।
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गरगाश ने कहा कि मौजूदा संकट से निपटने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देनी चाहिए। सैन्य समाधान पहले से जटिल हालात को और बिगाड़ सकते हैं और इससे संकट से बाहर निकलने का कोई त्वरित रास्ता नहीं मिलेगा। हालांकि, उन्होंने माना कि अमेरिका और ईरान के रुख में काफी अंतर है। यदि दोनों पक्षों के बीच मतभेद दूर नहीं हुए तो स्थिति और खराब हो सकती है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र और ईरान, दोनों के हित में युद्ध का एक और दौर नहीं है, लेकिन यूएई और उसके पड़ोसी देश किसी भी संभावित तनाव के लिए तैयार हैं।
कतर में बातचीत की कोशिश
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, ईरानी वार्ताकार कतर में एक प्रस्ताव पर बातचीत कर रहे हैं, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द फिर से खोला जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं हो रही है। किसी भी समझौते का अंतिम परिणाम अमेरिका की ओर से ईरान के सवालों पर दिए जाने वाले जवाब पर निर्भर करेगा। अराघची ने कहा कि ईरान चाहता है कि अमेरिका अन्य रास्तों के बजाय कूटनीति को चुने। उन्होंने कहा कि ईरान बातचीत और अपनी रक्षा, दोनों के लिए तैयार है।
खाड़ी देशों ने बढ़ाई रक्षा तैयारी
अंतरराष्ट्रीय सामरिक अध्ययन संस्थान (IISS) के मुताबिक, अप्रैल में युद्धविराम होने से पहले ईरान ने यूएई पर 3,000 से ज्यादा ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए थे। इनमें हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों और तेल सुविधाओं को निशाना बनाया गया। इनमें से ज्यादातर हमलों को रोक लिया गया। इसके बाद खाड़ी देशों ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं।
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यूएई के सलाहकार ने कहा कि युद्ध के बाद अमेरिका और यूएई के संबंध और मजबूत हुए हैं। वहीं, बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल लतीफ बिन राशिद अल जायनी ने भी तनाव कम करने और बातचीत के प्रयासों का समर्थन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान समुद्री, हवाई और डेटा से जुड़े बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर क्षेत्र की स्थिरता को खतरे में डाल रहा है। उनके मुताबिक, युद्धविराम के बाद भी ऐसे खतरे जारी रहे हैं। उन्होंने सऊदी अरब में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों का भी जिक्र किया।
IISS के अनुसार, युद्ध के दौरान ईरान ने बहरीन की ओर करीब 500 ड्रोन और लगभग 200 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी थीं। इन हमलों में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के ठिकाने, रिहायशी इमारतों, वित्तीय क्षेत्र और पानी साफ करने वाले संयंत्र को निशाना बनाया गया था।