ओमान तट के पास भारतीय जहाज पर हमले की यूएई ने निंदा की है। यूएई ने बिना किसी देश या संगठन का नाम लिए कहा कि होर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों का इस्तेमाल 'आर्थिक दबाव' या 'ब्लैकमेल' के लिए करना समुद्री डकैती जैसा है और इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता, लोगों की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को खतरा पैदा होता है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शुक्रवार को अबू धाबी दौरे से ठीक पहले संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने ओमान तट के पास भारतीय ध्वज वाले एक जहाज पर हुए हमले की कड़ी निंदा की है। यूएई ने इसे आतंकी हमला और अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया साथ ही भारत के साथ पूरी एकजुटता की बात कही है।
'भारतीय जहाज पर हुआ हमला खतरनाक उकसावा'
यूएई के विदेश मंत्रालय (एमओएफए) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ओमान के समुद्री क्षेत्र के पास भारतीय जहाज पर हुआ हमला 'खतरनाक उकसावा' है, जिसका उद्देश्य अहम समुद्री रास्तों की स्थिरता को नुकसान पहुंचाना है। मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है और इससे वैश्विक समुद्री सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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भारत के हर कदम का समर्थन - संयुक्त अरब अमीरात
यूएई ने भारत को भरोसा दिलाया कि वह भारतीय जहाजों और समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए उठाए जाने वाले हर कदम का समर्थन करेगा। बयान में कहा गया कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव का उल्लंघन है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी की घटना की निंदा
वहीं भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय झंडे वाले जहाज पर हमला पूरी तरह अस्वीकार्य है और व्यापारिक जहाजों तथा आम नाविकों को लगातार निशाना बनाया जाना बेहद चिंताजनक है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि जहाज पर मौजूद सभी भारतीय चालक दल सुरक्षित हैं और ओमान प्रशासन ने उन्हें बचाने में मदद की है। भारत ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर हमले और समुद्री व्यापार में बाधा डालने वाली घटनाओं से बचना चाहिए।
पीएम मोदी की यात्रा के दौरान उठ सकता है मुद्दा
हालांकि भारत सरकार ने अभी तक जहाज का नाम या हमले में किसी नुकसान की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन सरकारी सूत्रों के मुताबिक नई दिल्ली पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की अबू धाबी यात्रा के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठ सकता है। भारत और यूएई के बीच खाड़ी क्षेत्र और अरब सागर में समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा होने की संभावना है।