चीन के विरोध के बावजूद अमेरिका ताइवान को टैंक व कई अन्य हथियार बेचने की योजना बना रहा है। दोनों देशों में जारी ट्रेड वॉर के बीच यह समझौता 2 अरब डॉलर का होगा। इस समझौते की रूपरेखा तैयार कर रहे चार अमेरिकी अधिकारियों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी।
अमेरिका के इस कदम से चीन की त्योरियां चढ़ गई हैं। इस समझौते पर चिंता जाहिर करते हुए चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान से बचाने के लिए ताइवान को हथियार बेचना बंद करे।
अधिकारियों ने बताया, प्रस्तावित खरीद के बारे में अमेरिकी संसद को सूचित कर दिया गया है। ताइवान को 108 एम1ए2 एबरैम्स टैंक, एंटी-टैंक और एंटी-एयरक्राफ्ट बेचे जाने की संभावना है। बता दें कि चीन ताइवान को अपना हिस्सा बताता रहा है और उस पर कब्जे के लिए कई बार सैन्य कार्रवाई की धमकी दे चुका है।
चीन द्विपक्षीय क्षेत्र ताइवान के साथ अमेरिका के बढ़ते संबंधों से चिंतित है। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने पिछले महीने कहा था कि चीन के बढ़ते दबाव के मद्देनजर अमेरिका हमारी रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए नए हथियार खरीदने के हमारे आग्रह पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहा है।
बता दें कि अमेरिका ताइवान को पहले भी हथियार बेचता रहा है लेकिन एम1ए2 एबरैम्स टैंक से ताइवान की सेना को नई ताकत मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि यदि यह समझौता सफल रहा तो आगे अमेरिका ताइवान को 409 रेथियॉन और जैवलिन मिसाइल के साथ एंटी टैंक मूनशिप भी बेचेगा।
अमेरिका ने पिछले साल सितंबर में ताइवान को 33 करोड़ डॉलर के सैन्य उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दी थी। इसमें एफ-16 लड़ाकू विमान और अन्य सैन्य विमानों के कलपुर्जे शामिल थे।
मलेशिया, इंडोनेशिया को भी मिलेंगे अमेरिकी हथियार
पेंटागन ने पिछले हफ्ते ही घोषणा की थी कि वह मलेशिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस और वियतनाम को 34 स्कैन ईगल ड्रोन बेचेगा। यह सौदा कुल 4.7 करोड़ डॉलर का होगा। इन देशों के लिये यह ड्रोन खुफिया जानकारी जुटाने का काम करेंगे, ताकि दक्षिण चीन सागर पर चीन की बढ़ती दखलंदाजी पर अंकुश लगाया जा सके। बता दें कि चीन दक्षिण चीन सागर पर अपना अधिकार बताया है, जबकि यह सभी देश चीन के इस दावे को खारिज करते हैं।