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दो तिहाई महिलाओं ने गर्भनिरोधक उपायों का इस्तेमाल छोड़ा - रिपोर्ट

Mon, 28 Oct 2019 02:46 AM IST
Abhishek Singh यूएन हिंदी समाचार

सार

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन का 36 निम्न और मध्य आय वाले देशों पर अध्यन
  • 65 फीसदी महिलाओं ने गर्भनिरोधक उपायों का नहीं किया इस्तेमाल
  • संयुक्त राष्ट्र कोष के अनुसार प्रसव के दौरान बड़ी संख्या में लड़कियों की होती है मौत 
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इंडोनेशिया के एक स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराती एक महिला - फोटो : यूएन
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विस्तार
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट शुक्रवार को प्रकाशित की है। परिवार नियोजन को परखने के इरादे से यह अध्ययन 15 से 49 वर्ष की दस हजार महिलाओं पर आधारित था जो 36 निम्न और मध्य आय वाले देशों से हैं।

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यह अध्ययन पुष्टि करता है कि बिना किसी मंशा के गर्भधारण करने वाली 65 फीसदी महिलाओं ने या तो गर्भनिरोधक उपायों का इस्तेमाल नहीं किया या फिर पारंपरिक तरीकों का सहारा लिया।

बिना मंशा के गर्भ धारण करने वाली 50 फीसदी महिलाओं ने गर्भवती होने से पांच साल पहले से किसी भी गर्भनिरोधक उपाय का इस्तेमाल नहीं किया था। 10 प्रतिशत महिलाओं का कहना है कि जो भी तरीके उन्होंने इस्तेमाल किए वे सब पारंपरिक थे।
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विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि बिना मंशा के गर्भधारण होने का अर्थ हमेशा अनचाहा गर्भधारण नहीं होता है। इसे उपयुक्त योजना के बगैर गर्भधारण माना जा सकता है जिसके शिशु और मां के लिए स्वास्थ्य जोखिम और जटिलताएं हो सकती हैं – जैसे कुपोषण, बीमारी, उपेक्षा या फिर मौत भी।

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी का कहना है कि जन्म नियंत्रण के प्रति चिंताओं और मुद्दों को असरदार परिवार नियोजन, परामर्श और समर्थन के जरिए दूर किया जा सकता है।

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बिना योजना के गर्भधारण को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया है। निम्न और मध्य आय देशों में सात करोड़ से ज्यादा महिलाएं हर वर्ष इसका सामना करती हैं। इस वजह से ढाई करोड़ से ज्यादा महिलाएं असुरक्षित गर्भपात कराती हैं और 47 हजार से ज्यादा मातृत्व मौतें होती हैं।

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के अनुसार गर्भावस्था और प्रसव के दौरान जटितताओं की वजह से किशोर लड़कियों (15-19 वर्ष) की बड़ी संख्या में मौत होती है। अक्सर इन युवा महिलाओ और लड़कियों को स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी सूचनाएं और सेवाएं नहीं मिल पाती हैं।

इस चुनौती से निपटने के लिए कानूनी, नीतिगत, सामाजिक और सांस्कृतिक अवरोधों से पार पाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

साथ ही प्रभावी गर्भनिरोधक सेवाओं को उन महिलाओं को मुहैया कराना भी अहम होगा जो चिंताओं के साथ रहने को मजबूर हैं। इसके अलावा कुशल स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा प्रभावी देखरेभ भी महत्वपूर्ण है।
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