सार
काला सागर में दो टैंकर कैरोस और विराट पर हमला और आग लगने की घटनाएं हुईं।तुर्किये अधिकारियों ने बताया कि सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं। ये जहाज रूस पर लगे प्रतिबंधों से बचने वाले ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा हैं। कैरोस तट से 45 किमी दूर, विराट 35 नॉटिकल माइल दूर प्रभावित हुआ। फिलहाल घटना की जांच जारी है।
काले सागर से गुजर रहे पश्चिमी अफ्रीकी देश गाम्बिया के झंडे वाले जहाज में लगी आग (सांकेतिक)
- फोटो : ANI
छह देशों बुल्गारिया, जॉर्जिया, रोमानिया, रूस, तुर्किये और यूक्रेन से घिरे काले सागर में दो अलग-अलग टैंकरों कैरोस और विराट पर हमला होने और आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं के बारे में जानकारी देते हुए तुर्किये अधिकारियों ने बताया कि दोनों जहाजों के सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं और बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिया गया। ये जहाज रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए चलाए जाने वाले ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा हैं। तुर्किये ने कैरोस की आग लगने वाली जगह की दूर से ली गई तस्वीरें भी जारी की हैं। फिलहाल दोनों घटनाओं की जांच जारी है।
बात अगर पहले टैंकर 'कैरोस' की करें तो गाम्बिया झंडे वाला ये टैंकर तुर्किये के कोकाली प्रांत से करीब 45 किमी दूर समुद्र में आग की चपेट में आ गया। अधिकारियों ने आग का कारण बाहरी हमला बताया, लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं दी। यह टैंकर खाली था और रूस के नोवोरोसिस्क पोर्ट की ओर जा रहा था। हालांकि घटना के बाद सभी क्रू सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया।
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'विराट' टैंकर का कैसा है हाल
अब बात अगर दूसरे टैंकर विराट की करें तो कैरोस टैंकर में आग लगने के कुछ ही समय बाद विराट नाम का दूसरा टैंकर भी काला सागर में तुर्की तट से लगभग 35 नॉटिकल माइल दूर हमले की चपेट में आया। इंजन रूम में भारी धुआं देखा गया, लेकिन सभी क्रू सदस्य सुरक्षित बताए गए।
दोनों जहाज ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा
बता दें कि ओपनसैंक्शन्स डेटाबेस के अनुसार दोनों टैंकर ‘शैडो फ्लीट’ का हिस्सा हैं। यानी वे जहाज जिनका इस्तेमाल रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है। विराट पर इस साल जनवरी में पहले अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए, फिर यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, कनाडा और स्विट्जरलैंड ने भी कार्रवाई की।
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दूसरी ओर कैरोस पर जुलाई में यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाए, जिसके बाद ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड ने भी इसे सूची में शामिल किया। ऐसे में ओपन सैक्शन्स का कहना है कि यह शैडो फ्लीट रूस को प्रतिबंधों से बचाकर अरबों डॉलर कमाने का रास्ता देती है और साथ ही पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है।