अमेरिका ने इराक में और बल भेजने का संकल्प लिया है और दूसरी ओर, ट्रंप ने कहा है कि वह युद्ध नहीं चाहते हैं। इस बीच संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत मजीद तख्त रवांची ने ‘सीएनएन’ से कहा कि ये हमले ‘अमेरिका की ओर से युद्ध की कार्रवाई’ ही हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच ये हमले नाटकीय घटनाक्रम हैं।
ट्रंप बोले, सुलेमानी था कई हमलों के जिम्मेदार
वहीं, अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी सैन्य कमांडर की मौत के बाद निजी रिसॉर्ट में नए साल की छुट्टी मना रहे ट्रंप मीडिया से मुखातिब हुए और कहा कि हम सुलेमानी के आतंक का शिकार हुए लोगों को याद करते हैं।
वह पिछले 20 वर्ष से मध्य-पूर्व को अस्थिर करने के लिए आतंकी साजिशों को अंजाम दे रहा था। उसने लंदन और दिल्ली में बड़े हमले की साजिश रची। हाल ही में सुलेमानी ने ईरान में प्रदर्शनकारियों के क्रूर दमन का नेतृत्व किया। वहां 1,000 से अधिक निर्दोष नागरिकों को यातनाएं दीं और मार डाला गया।
इराक में शनिवार को होने वाले हवाई हमले से अमेरिकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेना ने इनकार किया है। अमेरिकी अगुआई वाले गठबंधन बल के प्रवक्ता ने ट्वीट करके यह जानकारी दी। इस हमले में एक हश्द अल-शाबी के कमांडर समेत छह लोगों के मारे जाने और कई के घायल होने की खबरें हैं। हालांकि देर रात हुए इस हमले में हश्द के किस कमांडर की मौत हुई है यह खुलासा नहीं किया गया है।
ईरान ने यूएन को लिखा पत्र, हमें आत्मरक्षा का अधिकार है
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस से कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत उसे आत्मरक्षा का अधिकार है। संयुक्त राष्ट्र में ईरानी राजदूत माजिद तख्त रवांची ने विश्व संस्था को लिखे अपने पत्र में कहा है कि सुलेमानी की हत्या प्रायोजित आतंकवाद का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
यह एक आपराधिक कृत्य और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है। यही नहीं यह कृत्य संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का भी उल्लंघन है। मालूम हो कि अमेरिकी हवाई हमले के बाद पैदा हुए हालातों पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव भी चिंता जता चुके हैं।
ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले मेें मौत के बाद यहां स्थित अमेरिकी, इजराइली व ईरानी दूतावास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ाने के साथ यहां सीसीटीवी कैमरों से लोगों की आवाजाही पर सख्त नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां कैसे भी हालात से निपटने के लिए सर्तक हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 2012 में दिल्ली में इजराइली राजनयिकों पर बम हमले की साजिश में सुलेमानी हाथ माना जाता है। दिल्ली पुलिस की जांच में भी धमाके के पीछे कुद्स सेना का हाथ सामने आया था।
अपने जनरल की मौत के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खामनेई व राष्ट्रपति रूहानी से अमेरिका और इजराइल से बदला लेने की धमकी दी है। इसे देखते हुए भारतीय खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली के शांति पथ स्थित अमेरिकी और एपीजे अब्दुल कलाम रोड स्थित इजराइली दूतावास पर हमले की आशंका जताई है।
खुफिया इनपुट मिलने पर दिल्ली पुलिस और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों की शुक्रवार को हुई आपात बैठक में दोनों दूतावासों की सुरक्षा सख्त करने का फैसला किया गया था। शनिवार को अमेरिकी दूतावास पर मौजूद एक सुरक्षाकर्मी ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि यहां सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है।
बाहर की सुरक्षा संभाल रही दिल्ली पुलिस की गश्त में भी बढ़ोतरी कर दी गई है। दूतावास पर दिन-रात विशेष निगरानी रखी जा रही है। यहां आने वालों की सीसीटीवी कैमरे से निगरानी हो रही है। दूतावास के आसपास किसी को भी फटकने की इजाजत नहीं है।
कमोबेश यही स्थिति इजराइली दूतावास की है। इसके बाहर रुकने की किसी को भी इजाजत नहीं है। पूरी तरह सीसीटीवी कैमरे से लैस दूतावास की बाहरी सुरक्षा में अर्धसैनिक बल तैनात हैं। इन्होंने बताया कि 24 घंटे दूतावास की निगरानी की जा रही है।
सुरक्षा के ऐसे ही विशेष इंतजाम हेली रोड पर स्थित ईरानी दूतावास में दिखे। यहां तैनात दिल्ली पुलिस के जवान विशेष नजर रखे हैं। सीसीटीवी से भी निगरानी रखी जा रही है।