नेपाल के मधेस इलाके में आधार रखने वाली दो प्रमुख पार्टियां अंदरूनी कलह में फंस गई हैं। इस वजह से नेपाल की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। मधेस इलाके में ज्यादातर आबादी भारत से यहां आकर बसे लोगों की है। उपेंद्र यादव के नेतृत्व वाली जनता समाजवादी पार्टी और महंत ठाकुर के नेतृत्व वाली लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी हाल में इस इलाके के प्रमुख दल रहे हैं।
मधेसी लेखक और स्तंभकार सीके लाल ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘मधेस इलाके की पार्टियों के पास अब कोई एजेंडा नहीं है। अब उनके पास बांटने के लिए अब पहले जैसी सत्ता भी नहीं है, इसलिए वे अपने मतभेदों को ढक नहीं पा रही हैं। अब उनके नेता चुनाव तंत्र में अपनी हैसियत बनाए रखने के लिए लड़ रहे हैं।’
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जनता समाजवादी पार्टी में चीन बड़े नेताओं- पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र यादव, वरिष्ठ नेता बाबूराम भट्टराई और पूर्व कृषि मंत्री महेंद्र राया यादव के बीच टकराव है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक विवाद हाल में तब गहरा गया, जब उपेंद्र यादव ने बिना पार्टी में विचार-विमर्श किए नेशनल असेंबली के लिए दो उम्मीदवार घोषित कर दिए। जनता समाजवादी पार्टी अभी नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल है। उपेंद्र यादव शेर बहादुर देउबा की सरकार में कृषि मंत्री हैं। बताया जाता है कि उपेंद्र यादव के मंत्री बनने के समय से महेंद्र यादव उनसे खफा हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मधेसी पार्टियों में अंदरूनी कलह का पुराना इतिहास है। इस कारण अतीत में उनकी एकता की कोशिशें सफल नहीं हुई हैं। अप्रैल 2017 में छह मधेसी पार्टियों और गुटों ने आपस में विलय कर राष्ट्रीय जनता पार्टी का गठन किया था। लेकिन 2020 में राष्ट्रीय जनता पार्टी का समाजवादी पार्टी में विलय हो गया। जबकि समाजवादी पार्टी का गठन मई 2019 में उपेंद्र यादव के नेतृत्व वाले संघीय समाजवादी फोरम और बाबूराम भट्टराई के नेतृत्व वाली नई शक्ति पार्टी के विलय से हुआ था। विलय के बाद बनी पार्टी का नाम जनता समाजवादी पार्टी रखा गया।