फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नेपाल: मधेसी पार्टियां दोहरा रही हैं अपना पुराना इतिहास, अंदरूनी कलह में फंसी

Fri, 14 Jan 2022 02:20 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो

सार

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मधेसी पार्टियों में अंदरूनी कलह का पुराना इतिहास है। इस कारण अतीत में उनकी एकता की कोशिशें सफल नहीं हुई हैं। अप्रैल 2017 में छह मधेसी पार्टियों और गुटों ने आपस में विलय कर राष्ट्रीय जनता पार्टी का गठन किया था...
विज्ञापन
समाजवादी पार्टी नेपाल - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नेपाल के मधेस इलाके में आधार रखने वाली दो प्रमुख पार्टियां अंदरूनी कलह में फंस गई हैं। इस वजह से नेपाल की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। मधेस इलाके में ज्यादातर आबादी भारत से यहां आकर बसे लोगों की है। उपेंद्र यादव के नेतृत्व वाली जनता समाजवादी पार्टी और महंत ठाकुर के नेतृत्व वाली लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी हाल में इस इलाके के प्रमुख दल रहे हैं।

विज्ञापन


ये दोनों पार्टियां मधेसी लोगों की आवाज रही हैं। लेकिन अब दोनों अंदरूनी लड़ाई में फंसी हुई हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इन दोनों पार्टियों के पास अब कोई एजेंडा नहीं है। इसलिए वे अंदरूनी कलह में फंस गई हैं। उनके अंदरूनी मतभेदों की वजह विचारधारा नहीं है। उनके नेताओं में झगड़ा पद और संसाधनों के लिए है।

नहीं है कोई एजेंडा

मधेसी लेखक और स्तंभकार सीके लाल ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- ‘मधेस इलाके की पार्टियों के पास अब कोई एजेंडा नहीं है। अब उनके पास बांटने के लिए अब पहले जैसी सत्ता भी नहीं है, इसलिए वे अपने मतभेदों को ढक नहीं पा रही हैं। अब उनके नेता चुनाव तंत्र में अपनी हैसियत बनाए रखने के लिए लड़ रहे हैं।’  

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक जनता समाजवादी पार्टी में चीन बड़े नेताओं- पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र यादव, वरिष्ठ नेता बाबूराम भट्टराई और पूर्व कृषि मंत्री महेंद्र राया यादव के बीच टकराव है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक विवाद हाल में तब गहरा गया, जब उपेंद्र यादव ने बिना पार्टी में विचार-विमर्श किए नेशनल असेंबली के लिए दो उम्मीदवार घोषित कर दिए। जनता समाजवादी पार्टी अभी नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन में शामिल है। उपेंद्र यादव शेर बहादुर देउबा की सरकार में कृषि मंत्री हैं। बताया जाता है कि उपेंद्र यादव के मंत्री बनने के समय से महेंद्र यादव उनसे खफा हैं।

विज्ञापन


खबरों के मुताबिक महेंद्र यादव तब बुनियादी ढांचा और परिवहन मंत्री बनना चाहते थे। लेकिन उपेंद्र यादव ने पार्टी कोटे से रेणु यादव का नाम इस पद से लिए आगे बढ़ा दिया। रेणु यादव अभी बुनियादी ढांचा और परिवहन मंत्री हैं। ये मंत्रालय संसाधन समृद्ध माना जाता है।

लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी में बताया जाता है कि अध्यक्ष महंत ठाकुर के खिलाफ दर्जनों नेताओं ने बागी रुख अपना लिया है। उनका आरोप है कि ठाकुर एकतरफा ढंग से फैसले ले रहे हैं। इन फैसलों में पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों की नियुक्ति भी है।

2017 में मधेसी गुटों ने बनाई थी राष्ट्रीय जनता पार्टी

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि मधेसी पार्टियों में अंदरूनी कलह का पुराना इतिहास है। इस कारण अतीत में उनकी एकता की कोशिशें सफल नहीं हुई हैं। अप्रैल 2017 में छह मधेसी पार्टियों और गुटों ने आपस में विलय कर राष्ट्रीय जनता पार्टी का गठन किया था। लेकिन 2020 में राष्ट्रीय जनता पार्टी का समाजवादी पार्टी में विलय हो गया। जबकि समाजवादी पार्टी का गठन मई 2019 में उपेंद्र यादव के नेतृत्व वाले संघीय समाजवादी फोरम और बाबूराम भट्टराई के नेतृत्व वाली नई शक्ति पार्टी के विलय से हुआ था। विलय के बाद बनी पार्टी का नाम जनता समाजवादी पार्टी रखा गया।

विज्ञापन


विश्लेषकों का कहना है कि अब इस पार्टी के नेताओं में बेहद मतभेद गहरा गए हैं। इससे पार्टी के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गया है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें