ब्रिटेन में कोरोना वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के मामले बड़े पैमाने पर सामने आए हैं। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित कोविड-19 वैक्सीन एस्ट्राजेनेका की पहली खुराक लेने के बाद दूसरी खुराक लेने पर साइड इफेक्ट्स के मामले सामने आ रहे हैं।
शुरुआती नतीजों में कितना प्रभावी पाई गई थी ऑक्सफोर्ड वैक्सीन?
चिम्पैंजी में सर्दी-जुकाम करने वाले एडिनोवायरस में जेनेटिक बदलाव करने और उसके ऊपर कोरोना वायरस की स्पाइक प्रोटीन लगाकर बनाई गई ऑक्सफोर्ड वैक्सीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए इंसानी ट्रायल के शुरुआती नतीजों में औसतन 70.4 प्रतिशत प्रभावी पाया गया था।
बता दें कि फरवरी महीने की शुरुआत (3 फरवरी) में एक अध्ययन में दावा किया गया था कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के टीके (Oxford-AstraZeneca vaccine) की पहली खुराक कोविड-19 के संक्रमण को 67 प्रतिशत तक कम करने में मदद कर सकती है और घातक वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने में यह बहुत प्रभावी है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में यह कहा गया था।
तब ब्रिटेन की सरकार ने इसे दुनिया के लिए अच्छी खबर बताया था क्योंकि कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ मुकाबले में टीके की भूमिका महत्वपूर्ण है। शोध रिपोर्ट में कहा गया था कि, ‘आंकड़ों से पता चला है कि यह (टीका) आबादी के बीच संक्रमित लोगों की संख्या घटाकर संक्रमण रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।'