तुर्किए के राष्ट्रपति चुनावों की गिनती जारी है। वर्तमान राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन एक बार फिर पद की दौड़ में है। कमाल कलचदारलू इस बार उन्हें कड़ी चुनौती दे रहे हैं। हालांकि, एर्दोगन फिलहाल रेस में आगे हैं।
गृहनगर में कलचदारलू को सबसे ज्यादा वोट
नतीजों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई
तुर्किए में प्रथम चरण का चुनाव 14 मई को हुआ था। प्रथम चरण के अनुसार, एर्दोगन को 49.24 फीसदी तो कमाल को 45.07 प्रतिशत वोट मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार, तीसरे प्रतिद्वंदी सिनेन ओगन सिर्फ 5.28 फीसदी मत ही जीत सकें। किसी भी उम्मीदवार को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण रनऑफ किया गया। बता दें, तुर्किए के चुनाव आयोग ने पहले चरण के दौरान सभी पार्टियों की स्थिति के बारे में जानकारी साझा की थी। लेकिन अब तक नतीजों की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। 15 मई 2023 को तुर्किए चुनाव बोर्ड के प्रमुख अहमत येनर ने कहा था कि देश के भीतर लोगों के 71.64 प्रतिशत वोट और विदेश से 18.76 प्रतिशत वोट उसके सिस्टम में दर्ज किए गए। उन्होंने कहा कि सिस्टम में कुल 69.12 प्रतिशत वोट दर्ज किए गए हैं।
विदेशी प्रवासियों ने भी किया मतदान
एर्दोगन ने आखिरी चुनावी रैली में विपक्ष को घेरा
अपने आखिरी रैली में एर्दोगन ने विपक्ष पर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ मिलकर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष को पश्चिमी देशों से आदेश दिया जा रहा है। यदि उनकी सरकार बनती है तो वे पश्चिमी देशों की इच्छाओं के आगे झुक जाएंगे। विश्लेषकों ने अनुमान लगाया कि राष्ट्रपति की दौड़ में एर्दोगन, मुख्य विपक्षी उम्मीदवार केमाल किलिकदारोग्लु और रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी और छह पार्टी राष्ट्र गठबंधन के लिए उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर होने वाली है।
भूकंप से एर्दोगन के गढ़ को हुआ था ज्यादा नुकसान
तुर्किये के उप विदेश मंत्री ने बताया कि विदेशों में रहने वाले तुर्किए के लोगों ने पहले ही मतदान कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस साल फरवरी में आए भूकंप में जिन क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा था, उनमें से अधिकतर इलाका राष्ट्रपति एर्दोगन का गढ़ था। राष्ट्रपति की दौड़ में एर्दोगन और किलिकदरोग्लु के अलावा राइट विंग एंसेस्ट्रल अलाइंस के उम्मीदवार सिनान ओगन भी शामिल है। वहीं सेंट्रिस्ट होमलैंड के उम्मीदवार इंस ने बताया कि उनके खिलाफ चलाए गए बदनामी अभियान के बाद उन्होंने इस दौड़ से अपना नाम वापस ले लिया था। वे तुर्किए के सोशल मीडिया पर हफ्तों तक झूठे आरोपो का सामना करते रहे। साल 2018 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव की रेस में शामिल हुए थे लेकिन एर्दोगन के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।