तुर्किये और सीरिया के भूकंप प्रभावित इलाकों की सैटेलाइट इमेज।
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तुर्किये और सीरिया में आए शक्तिशाली भूकंप से मरने वालों की संख्या 41,000 से ज्यादा हो गई है। तुर्किये और पड़ोसी सीरिया में छह फरवरी को भूकंप के शक्तिशाली झटके महसूस किए गए थे। रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 7.8 मापी गई थी। आपदा में जान गंवाने वालों का आंकड़ा अभी बढ़ भी सकता है।
मां और दो बच्चों को बचाया गया
इससे पहले गुरुवार को तुर्किये के दक्षिणी शहर कहामनमारस में दो महिलाओं को मलबे से निकाला गया था। भूकंप के नौ दिन बाद एक मां और दो बच्चों को अंताक्या में बचाया गया था। भूकंप के 228 घंटे बाद भी अंतक्या में बचाव कार्य जारी रहा। अधिकारियों का कहना है कि भूकंप से बचने वाले लाखों लोगों को मानवीय सहायता की आवश्यकता है, साथ ही बहुत से लोग ठंड के मौसम में बेघर हो गए हैं। ऐसे लोगों की तत्काल मदद की जानी चाहिए।
भारतीय सेना कर रही मदद
भारतीय सेना कठिन समय के दौरान तुर्किये और सीरिया की मदद कर रही है। हाल ही में यूएनडीओएफ के हिस्से के रूप में तैनात भारतीय सेना की टीम ने अलेप्पो, सीरिया में राहत सामग्री पहुंचाई। सामग्री में भारत के राशन और दवा के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का योगदान भी शामिल था। 'ऑपरेशन दोस्त' के तहत भारत ने भूकंप प्रभावित तुर्किये और सीरिया को जीवन रक्षक मानवीय चिकित्सा सहायता मुहैया कराई है।
सीरिया और तुर्किये की मदद कर रहा भारत
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मंडाविया ने ट्विटर पर कहा कि भारत वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा के साथ सीरिया और तुर्किये की मदद कर रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने जीवन रक्षक आपातकालीन दवाएं, सुरक्षात्मक सामान, चिकित्सा उपकरण, महत्वपूर्ण देखभाल से जुड़ी चीजें आदि प्रभावित इलाकों में भेजी हैं।
एनडीआरएफ ने संभाल रखा है मोर्चा
वहीं, तुर्किये में तैनात राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के छह श्वान (Dogs) मलबे के नीचे फंसे लोगों की तलाश में बेहद प्रभावी साबित हुए हैं। अन्य देशों की टीम ने भी श्वानों की मदद से बचाव अभिायन चलाया है। एनडीआरएफ अपनी दो टीम को गाजियांटेप से तुर्किये के भूमध्यसागरीय तट स्थित हताय भेजने की प्रक्रिया में है। गाजियांटेप में मलबे में दबे लोगों के अब जीवित बचे होने की संभावना लगभग न के बराबर है। एनडीआरएफ की तीसरी टीम पहले से ही हताय में है।