तुर्किये में छह फरवरी को स्थानीय समयानुसार सुबह 4.17 बजे दक्षिणी तुर्किये के गाजियानतेप शहर के पास 7.8 तीव्रता का भूकंप आया। इसके झटके सीरिया, लेबनान, साइप्रस और इराक के प्रांतों में महसूस किए गए। सीरिया में क्षतिग्रस्त इमारतों के ढहने की खबरें आईं। शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया कि गाजियानतेप में 70 लोगों की मौत हुई। स्थानीय समयानुसार सुबह 4.28 बजे 6.7 तीव्रता के भूकंप के बाद पहले झटके महसूस किए गए।
विनाशकारी भूकंप के बाद भारत, अमेरिका सहित कई देशों ने तुर्किये में मदद भेजने का ऐलान कर दिया। भारत ने बड़ी मात्रा में राहत सामग्री के साथ तुर्किये में एनडीआरएफ व सेना की मेडिकल टीम को रवाना किया। बड़े स्तर पर चलाए गए राहत एवं बचाव कार्य के बाद भी यहां मृतकों की संख्या बढ़ती गई। अब तक 50 हजार से ज्यादा मौतें रिकॉर्ड की गई हैं। करीब 16 हजार इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं और लाखों लोग बेघर हो गए हैं।
तुर्किये में विनाशकारी भूकंप के बाद विशेषज्ञ व अन्य लोग गलत तरीके से हुए निर्माण को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग बढ़ती ही जा रही है। लोगों का आरोप है कि अगर इंजीनियरिंग मानकों को पूरा किया गया होता तो इतनी बड़ी मात्रा में तबाही न होती। इस बारे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्राकृतिक आपदा का प्रभाव मानव विफलताओं के कारण है? विपक्षी दल भी और कुछ निर्माण विशेषज्ञों ने राष्ट्रपति पर भवन निर्माण नियमों को लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाया। इसके चलते राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन पर भी दबाव बढ़ा और उन्होंने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का एलान कर दिया।
राष्ट्रपति के एलान के बाद तुर्किये में ठेकेदारों-बिल्डरों पर कार्रवाई का दायरा बढ़ता जा रहा है। अब तक 184 संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा रहा है। 113 गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं और जांच के दायरे में 600 से अधिक लोग हैं। लोगों की जांच की जा रही है। शनिवार को न्याय मंत्री बेकिर बोजदाग ने कहा कि ठेकेदारों और संपत्ति के मालिकों सहित 184 संदिग्धों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार लोगों में एक कस्बे का एक मेयर भी है।