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Earthquake: भूकंप के बाद क्यों बार-बार महसूस किए जा रहे हैं झटके, क्या पहले भी ऐसी तबाही देख चुका है तुर्किये?

Tue, 07 Feb 2023 08:12 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भूकंप के बाद अक्सर कई झटके आते हैं। ये झटके भूकंप के कारण हुई क्षति में और बढ़ोतरी करते हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, झटके भूकंप की ही एक कड़ी होते हैं जो किसी फॉल्ट पर एक बड़े भूकंप के बाद आते हैं।
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तुर्किये में भूकंप - फोटो : AMAR UJALA
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विस्तार
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तुर्किये समेत चार देशों में भूकंप ने भीषण तबाही मचाई है। सबसे ज्यादा असर तुर्किये में हुआ है। यहां सैकड़ों इमारतें धराशायी हो गईं। तुर्किये और सीरिया में अब तक कम से कम पांच हजार लोग मारे गए हैं। करीब 15,000 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 
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भीषण भूकंप के बाद भी कई बार इसके झटके महसूस किए गए हैं। पहले भी जिन जगहों पर भूकंप आए थे, वहां एक बार भीषण भूकंप आने के बाद एक के बाद कई बार झटके क्यों महसूस होते हैं? तुर्किये में बार-बार भूकंप क्यों आ रहा है? यह भूकंप इतना विनाशकारी क्यों था? क्या पहले भी भूकंप से तबाह हो चुका है देश? आइये जानते हैं…

भूकंप का असर। - फोटो : अमर उजाला
पहले जानते हैं क्या हुआ?
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक, तुर्किये (पूर्व नाम तुर्की) में आया भूकंप 18 किलोमीटर की गहराई में था जिसका केंद्र सीरिया की उत्तरी सीमा के पास दक्षिणी तुर्किये था। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 7.8 मापी गई। शुरुआती भूकंप के बाद आये कई झटकों ने दोनों देशों को हिलाकर रख दिया। भूकंप का असर लेबनान और इस्राइल पर भूकंप का केंद्र गजियांतेप से करीब 33 किलोमीटर दूर था। यह सीरियाई सीमा से करीब 90 किलोमीटर दूर उत्तर में है। भूकंप के बाद करीब 20 झटके महसूस किए गए, जिनमें से सबसे शक्तिशाली झटका 6.6 की तीव्रता का था। 

यह किस प्रकार का भूकंप था?
भूकंप तब आता है जब पृथ्वी की सबसे बाहरी परत के बड़े टुकड़े अचानक एक दूसरे के पीछे चले जाते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, तुर्किये का भूकंप एक स्ट्राइक-स्लिप भूकंप था। इसे समझने से पहले हमें पृथ्वी की संरचना को समझना होगा। पृथ्वी अलग-अलग हिस्सों में बंटी हुई है। ये हिस्से एक फॉल्ट लाइन पर मिलते हैं, जहां प्लेटें आमतौर पर एक-दूसरे से टकराती हैं। लेकिन कभी-कभी तनाव बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तब प्लेटें बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकालते हुए एक-दूसरे को तेजी से पार करती हैं। इस स्थिति में, दो प्लेटें एक-दूसरे को झटके देते हुए दो अलग-अलग दिशाओं में चली जाती हैं। यही प्रक्रिया भूकंप आने का कारण बनती है।

तुर्किये भूकंप - फोटो : social media
भूकंप के बाद क्यों बार-बार झटके महसूस हो रहे हैं?
भूकंप के बाद अक्सर कई झटके आते हैं, जो घंटों या कई दिनों तक जारी रहते हैं। ये झटके भूकंप के कारण हुई क्षति में और बढ़ोतरी करते हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, झटके भूकंप की ही एक कड़ी होते हैं जो किसी फॉल्ट पर एक बड़े भूकंप के बाद आते हैं। झटके फाल्टलाइन (जहां चट्टानों के बीच छिद्र होता है) के पास आते हैं। हालांकि, झटके मुख्य भूकंप की तुलना में कमजोर होते हैं, लेकिन ये व्यापक नुकसान पहुंचा सकते हैं। तुर्किये में मुख्य भूकंप के कारण पहले से ही कमजोर हो चुकी इमारतें, झटकों से पूरी तरह से जमींदोज हो गईं।

विशेषज्ञों का कहना है कि तुर्की में 7.5 तीव्रता का बड़ा झटका वास्तव में अधिक विनाशकारी हो सकता था। यह झटका हल्का और कम गहरा था। मुख्य भूकंप 17.9 किमी गहराई पर आया था। सतह से निकटता के कारण हल्के भूकंप आमतौर पर गहरे भूकंपों की तुलना में अधिक तीव्र महसूस किए जाते हैं। झटके राहत और बचाव कार्यों में बाधा उत्पन्न करते हैं, कभी-कभी तो बचावकर्मी भी इसकी चपेट में आ जाते हैं।

तुर्किये में भूकंप - फोटो : Social Media
क्या तुर्किये और आसपास अक्सर भूकंप आते हैं? 
तुर्किये दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंप क्षेत्रों में से एक है। देश के तीन अलग-अलग टेक्टोनिक प्लेटों के मध्य स्थित होने के कारण यहां बार-बार भूकंप आते हैं। अधिकांश तुर्किये एनाटोलियन टेक्टोनिक प्लेट पर स्थित है। टेक्टोनिक प्लेट जिसे लिथोस्फेरिक प्लेट भी कहा जाता है, ठोस चट्टान का एक विशाल टुकड़ा होता है। 

भूकम्प विज्ञानियों के अनुसार टेक्टोनिक प्लेटों के बीच तनाव के स्तरों के कारण क्षेत्र में बड़े भूकंपों की संभावना काफी अधिक रहती है। राजधानी इस्तांबुल क्षेत्र लगभग 1.2 करोड़ निवासियों के साथ घनी आबादी वाला शहरी क्षेत्र है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां आधी आबादी भूकंपीय भवन मानकों के अनुपालन के बिना अवैध रूप से निर्मित आवास में रहती है।

भूकंप - फोटो : SOCIAL MEDIA
यह भूकंप इतना विनाशकारी क्यों था?
भूकंप काफी शक्तिशाली था। आमतौर पर, जो पानी के नीचे भूकंप होते हैं, वह काफी तीव्र होते हैं। यह भूकंप घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पास आया। केंद्र तुर्किये में एक प्रमुख शहर और प्रांतीय राजधानी गजियानटेप के पास था। विशेषज्ञों की मानें तो दक्षिणी तुर्किये के इस क्षेत्र में प्रभावित क्षेत्र में कई पुरानी इमारतें भी थीं। तेजी से हो रहे निर्माण के कारण संरचनाएं कमजोर हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि भूकंप के कारण हजारों इमारतें ढह गईं। 
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पहले भी भूकंप से कई तबाहियां देख चुका है देश? 
अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण तुर्किये ने पिछली शताब्दी में भी बार-बार बड़े भूकंप के झटके झेले हैं। दिसंबर 1939 में, पूर्वी तुर्किये में एरजीकन शहर के पास 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 30,000 से अधिक लोग मारे गए थे। बाद के दशकों में कई और भूकंप आए, जिनमें पूर्वी वान प्रांत में 1976 काल्डिरन-मुरादिये भूकंप भी शामिल है। इसके कारण 4,000 से अधिक मौतें हुईं थीं।

1939 की आपदा के बाद से अब तक का सबसे घातक भूकंप अगस्त 1999 में आया था, जब 7.4 तीव्रता का भूकंप पश्चिमी शहर इजमित में मारारा के क्षेत्र में आया था। इस आपदा में 17,000 से अधिक लोग मारे गए थे और 43,000 से अधिक घायल हुए थे। जनवरी 2020 में तुर्किये में एक और बड़ा भूकंप आया था। 6.7 तीव्रता वाले इस भूकंप ने देश के पूर्वी हिस्से में बड़ी क्षति पहुंचाई थी।
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