अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने फोन पर युद्ध खत्म करने को लेकर चर्चा की। उन्होंने जिनेवा बैठक और मार्च में होने वाले सत्र की तैयारियों पर बात की। जेलेंस्की ने अमेरिकी सैन्य मदद की सराहना की और कहा कि शांति के लिए बातचीत को बड़े नेताओं के स्तर पर ले जाना जरूरी है।
जिनेवा में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने फोन पर विस्तार से चर्चा की। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने का रास्ता खोजना है।
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जेलेंस्की ने दी जानकारी
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस बातचीत की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस कॉल में ट्रंप के साथ उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल थे। जेलेंस्की ने शांति बहाली की कोशिशों में ट्रंप और उनकी टीम की सक्रिय भागीदारी के लिए उनका आभार व्यक्त किया।
द्विपक्षीय बैठक पर हुई चर्चा
दोनों नेताओं ने जिनेवा में होने वाली द्विपक्षीय बैठक के कार्यसूची पर चर्चा की। इसके साथ ही मार्च की शुरुआत में होने वाले त्रिपक्षीय सत्र की तैयारियों को लेकर भी बात हुई। जेलेंस्की ने कहा कि वे 'पीयूआरएल' पहल को बहुत महत्व देते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यूक्रेन ने अमेरिका से जो एयर डिफेंस मिसाइलें खरीदी हैं, वे इस कठिन सर्दी में लोगों की जान बचाने और चुनौतियों का सामना करने में बहुत मददगार साबित हो रही हैं।
बातचीत को शीर्ष नेताओं के स्तर तक ले जाना जरूरी
यूक्रेनी राष्ट्रपति का मानना है कि इन बैठकों के माध्यम से बातचीत को शीर्ष नेताओं के स्तर तक ले जाने का मौका मिलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुश्किल और संवेदनशील मुद्दों को सुलझाने और युद्ध को पूरी तरह खत्म करने का यही एकमात्र प्रभावी तरीका है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इन शांति प्रयासों का समर्थन किया है।
इससे पहले मंगलवार को जेलेंस्की ने रूस के हमले के चार साल पूरे होने पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने केवल तीन दिनों में कीव पर कब्जा करने की कोशिश की थी, लेकिन यूक्रेन ने अपनी आजादी को बरकरार रखा। जेलेंस्की के अनुसार, यूक्रेन के कड़े प्रतिरोध ने मॉस्को के शुरुआती मंसूबों को पूरी तरह नाकाम कर दिया है। उन्होंने इस संघर्ष के दौरान यूक्रेन के लोगों के साहस और बलिदान की भी सराहना की।