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नोबेल शांति पुरस्कार पर ट्रंप नाराज: बोले- ये मुझे क्यों नहीं मिला, समिति और नवी पिल्लई पर क्या सवाल उठाए?

Sat, 10 Oct 2026 08:04 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उन्होंने आठ युद्ध खत्म कराए और दो अन्य संघर्षों को सुलझाने के करीब हैं। इसके बावजूद उन्हें 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला। यह सम्मान नवी पिल्लई को दिया गया है। ट्रंप ने उनके चयन पर सवाल उठाए और इस्राइल को लेकर आरोप भी लगाया। ट्रंप ने अपनी उपलब्धियों के बारे में क्या दावे किए? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने आठ युद्ध खत्म कराए हैं और दो अन्य संघर्षों को समाप्त करने या सुलझाने के करीब हैं। इसके बावजूद उन्हें या अमेरिका को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी उपलब्धियां गिनाते हुए पुरस्कार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवी पिल्लई के चयन पर भी टिप्पणी की। पिल्लै को यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय कानून और गंभीर अपराधों के खिलाफ न्याय सुनिश्चित करने में उनके योगदान के लिए दिया गया है।
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ट्रंप ने पुरस्कार नहीं मिलने पर क्या-क्या दावे किए?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर लिखा कि उन्होंने आठ युद्ध खत्म किए और दो अन्य संघर्षों को समाप्त करने या सुलझाने के करीब हैं। उन्होंने इस्राइल के सभी बंधकों की रिहाई का दावा किया। उनके अनुसार, अंतिम 28 बंधक भी वापस लाए गए, जिनमें जीवित और मृत दोनों शामिल थे। उन्होंने दुनिया के अलग-अलग देशों के सैकड़ों बंधकों को रिहा कराकर घर भेजने की बात भी कही। ट्रंप ने वेनेजुएला में युद्ध जीतने और वहां के शासक को पकड़ने का दावा किया। साथ ही कहा कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका। इन्हीं उपलब्धियों का हवाला देकर उन्होंने सवाल किया कि उन्हें या अमेरिका को नोबेल शांति पुरस्कार क्यों नहीं मिला।

नवी पिल्लई के चयन पर ट्रंप ने क्या सवाल उठाए?
नॉर्वे की नोबेल समिति ने शुक्रवार को नवी पिल्लई को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की थी। इसके बाद ट्रंप ने पुरस्कार के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि वह पिल्लै को नहीं जानते और उनके अनुसार, दूसरे लोग भी उनके बारे में नहीं जानते। ट्रंप ने यह आरोप भी लगाया कि पिल्लै स्पष्ट रूप से इस्राइल से नफरत करती हैं। ये ट्रंप के अपने आरोप हैं। नोबेल समिति ने पुरस्कार की घोषणा में पिल्लै के काम को आधार बनाया और कहा कि उन्होंने वैश्विक कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने में साहस और ईमानदारी के साथ योगदान दिया है।
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नोबेल समिति ने पिल्लै को सम्मान देने की क्या वजह बताई?
नोबेल समिति के अनुसार, पिल्लै ने युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के मामलों में दोषियों पर मुकदमा चलाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में रंगभेद के दौर में हुआ था। वह वकील बनीं और भेदभाव, अलगाव तथा लोगों को अधिकारों से वंचित रखने वाली व्यवस्था के खिलाफ काम किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय, रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में सेवाएं दीं। वह संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त भी रह चुकी हैं।

ईरान और दूसरे देशों को लेकर ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका। उन्होंने उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, जापान, चीन और ताइवान के बीच तनाव को टालने में भी अपनी भूमिका होने की बात कही। हालांकि, दिए गए बयान में इन दावों के समर्थन में अलग से विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। ट्रंप का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने के उनके प्रयासों को पर्याप्त मान्यता नहीं मिली। उन्होंने पुरस्कार के लिए पिल्लै के चयन पर सवाल उठाते हुए अमेरिका की भूमिका को अधिक महत्वपूर्ण बताया। दूसरी ओर, नोबेल समिति ने पिल्लै को अंतरराष्ट्रीय कानून और गंभीर अपराधों के खिलाफ न्याय के प्रयासों के लिए सम्मानित किया।

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय पर क्या कदम उठाया?
नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के कुछ घंटे बाद अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के खिलाफ अतिरिक्त प्रतिबंधों की घोषणा की। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी संप्रभुता से जुड़ी चिंताओं और अदालत से कथित खतरे के कारण की जा रही है। विभाग के अनुसार, अमेरिका पहले ही कार्यकारी आदेश के तहत 17 लोगों पर प्रतिबंध लगा चुका है और अब अदालत के खिलाफ भी अतिरिक्त कदम उठा रहा है। इन प्रतिबंधों के तहत अमेरिका में मौजूद या अमेरिकी नागरिकों के नियंत्रण वाली आईसीसी की संपत्ति को रोका जा सकता है। ऐसी संपत्ति की जानकारी अमेरिकी वित्त विभाग को देना भी जरूरी होगा। संबंधित प्रतिबंधों के तहत कुछ लेनदेन पर रोक है, हालांकि लागू छूट और अधिकृत अनुमति के प्रावधान भी हैं।
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