अमेरिका में कोयला उद्योग को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगभग 700 मिलियन डॉलर के नए समर्थन पैकेज की घोषणा करने जा रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य संघर्ष कर रहे कोयला संयंत्रों और कोयला निर्यात को मजबूती देना है।
कोयला उद्योग को फिर से मजबूत करने की तैयारी
व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, यह फंडिंग कोल्ड वॉर काल के रक्षा कानून के तहत दी जाएगी। इसके जरिए देशभर के 13 कोयला संयंत्रों को सहायता दी जाएगी और अलास्का तथा वेस्ट वर्जीनिया में नए कोयला संयंत्रों के निर्माण की योजना भी शामिल है। यह कदम 2013 के बाद अमेरिका में नए कोयला संयंत्रों के निर्माण की दिशा में पहला बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
14,000 से अधिक नौकरियों का दावा
सरकारी अनुमान के मुताबिक, इस योजना से कोयला, निर्माण, रेल और समुद्री परिवहन क्षेत्रों में 14,000 से अधिक रोजगार पैदा होने या सुरक्षित रहने की संभावना है। इसके अलावा, मैरीलैंड में बंद हो चुके कोयला संयंत्र को फिर से शुरू करने और कैलिफोर्निया के ओकलैंड में एक लंबे समय से रुके हुए कोयला निर्यात टर्मिनल को विकसित करने की योजना भी शामिल है।
ऊर्जा मांग और प्रशासन की नीति
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि बढ़ती ऊर्जा मांग, खासकर डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रिक वाहनों के कारण, पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की जरूरत बनी हुई है। इसी वजह से कुछ पुराने कोयला और गैस संयंत्रों को बंद होने से रोकने के आदेश भी दिए गए हैं।
पर्यावरण संगठनों की आलोचना
हालांकि इस योजना का पर्यावरण संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि कोयला उद्योग को बढ़ावा देने से प्रदूषण बढ़ेगा और बिजली की लागत भी प्रभावित हो सकती है। आलोचकों का मानना है कि नवीकरणीय ऊर्जा की जगह कोयले पर जोर देना पर्यावरण और जलवायु दोनों के लिए नुकसानदायक है।
अमेरिका की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव
2010 के बाद से अमेरिका में कोयले की हिस्सेदारी लगातार घटकर 2024 में लगभग 15% रह गई है। वहीं प्राकृतिक गैस और नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन का मानना है कि कोयला उद्योग देश की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।