अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (सीबीपी) की ओर से दायर एक याचिका के अनुसार अमेरिका ने ट्रंप के 'लिबरेशन डे' टैरिफ के तहत लगभग 100 अरब अमेरिकी डॉलर का रिफंड प्रोसेस किया है। इन टैरिफ को बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था। यह एजेंसी के इतिहास में टैरिफ रिफंड की सबसे बड़ी कोशिशों में से एक है।
कितने आवेदन जमा हुए है?
सीबीपी ने बताया कि सीएपीई प्रणाली ने शुरू होने के बाद से लाखों धनवापसी आवेदनों पर कार्रवाई की है। 31 जुलाई, 2026 तक, 252,496 सीएपीई आवेदन जमा किए गए थे, जिनमें से 178,213 आवेदन सत्यापन में सफल रहे।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा था?
टैरिफ रिफंड का संबंध ट्रंप प्रशासन की ओर से कुछ टैरिफ लगाने के लिए आईईईपीए के उपयोग को लेकर दायर की गई कानूनी चुनौती से है, यह नीति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार और विदेश नीति दोनों के एजेंडे का एक प्रमुख घटक बन गई थी। फरवरी में, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत के फैसले में कहा कि 1977 के आईईईपीए के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति के पास लगभग सभी अमेरिकी व्यापारिक साझेदारों से आने वाले सामानों पर व्यापक आयात शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि आईईईपीए राष्ट्रपति को शुल्क लगाने का अधिकार नहीं देता है। नौ न्यायाधीशों की पीठ ने 6-3 के मत से फैसला सुनाया, जिसमें मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की राय लिखी। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ब्रेट कावानाघ ने अपने असहमति वाले मत में कहा कि इस फैसले के तत्काल परिणाम काफी गंभीर हो सकते हैं, जिसमें संभावित रूप से कई अरब डॉलर की वापसी भी शामिल है।