अमेरिका में पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एक टीवी न्यूज चैनल पर रिपब्लिकन खेमे के प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप को डेमोक्रेट प्रतिद्वंद्वी कमला हैरिस के साथ बहस करनी थी। इसे लेकर काफी विवाद हुआ था। मामला इतना गंभीर हो गया कि अब लड़ाई अदालत तक जा पहुंची है। ट्रंप के वकील एडवर्ड एंड्रयू पाल्टजिक ने दावा किया है कि सीबीएस न्यूज ने डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी कमला हैरिस के साथ '60 मिनट' साक्षात्कार के वीडियो को एडिट किया गया है, जिसके कारण ट्रंप समेत कई लोगों को व्यापक भ्रम और मानसिक पीड़ा हुई।
कमला हैरिस को फायदा पहुंचाने का आरोप, 20 अरब डॉलर का मुकदमा दायर
अमेरिका में CBS न्यूज़ और इसकी पैरेंट कंपनी पैरामाउंट ग्लोबल के खिलाफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कानूनी टीम ने 20 अरब डॉलर का मुकदमा दायर किया है। ट्रंप का आरोप है कि पिछले साल "60 मिनट्स" कार्यक्रम में डेमोक्रेट खेमे की प्रतिद्वंद्वी नेता कमला हैरिस के इंटरव्यू को जिस तरह से एडिट किया गया उससे उन्हें नुकसान हुआ। ट्रंप के वकीलों का कहना है कि इससे उनकी प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा।
ट्रंप के दावों पर न्यूज चैनल की सफाई- केवल संक्षेप किया गया मंशा गलत नहीं
अदालत में सुनवाई के दौरान ट्रंप की लीगल टीम ने दावा किया कि वीडियो एडिटिंग के तरीके से जनता भ्रमित हुई। ट्रंप और उनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' को भी नुकसान पहुंचा। लोगों का ध्यान ट्रंप से हट गया। जवाब देते हुए CBS ने तमाम आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। चैनल की दलील है कि कमला हैरिस के इंटरव्यू के जवाब को केवल संक्षेप में प्रस्तुत किया गया। इसके पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी।
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चैनल के दो शीर्ष अधिकारियों ने इस्तीफा दिया
खबरों के मुताबिक CBS की पैरेंट कंपनी पैरामाउंट इस मामले को खारिज कराने का हरसंभव प्रयास कर रही है। अदालत के बाहर भी ट्रंप के साथ समझौते को लेकर बातचीत हो रही है। समझौते की संभावनाओं से नाराज दो शीर्ष अधिकारियों- CBS न्यूज़ की प्रेसिडेंट वेंडी मैकमोहन और "60 मिनट्स" के कार्यकारी निर्माता बिल ओवेन्स के इस्तीफे की खबर भी सामने आई है।
हर्जाने के तौर पर मोटी रकम चाहते हैं ट्रंप
इस हाइप्रोफाइल मुकदमे और CBS न्यूज़ में असंतोष फैलने की खबरों के बीच पैरामाउंट की तरफ से ट्रंप की कानूनी टीम को समझौते का ऑफर दिया गया है। इसके तहत 15 मिलियन डॉलर की पेशकश की गई है। हालांकि, ट्रंप इतने से संतुष्ट नहीं हैं। वे माफी के साथ-साथ हर्जाने के तौर पर और अधिक धनराशि चाहते हैं।
संभावित समझौते की जांच किए जाने के संकेत
मामला कितना हाइप्रोफाइल है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी सीनेटर रॉन वायडन, बर्नी सैंडर्स और एलिजाबेथ वॉरेन ने संभावित समझौते की जांच किए जाने के संकेत दिए हैं। तीनों इस बात की जांच कर रहे हैं कि कहीं सीबीएस (पैरामाउंट) और ट्रंप की टीम के बीच के समझौते से अमेरिका के रिश्वत कानूनों का उल्लंघन तो नहीं होता। खबर लिखे जाने तक पूरे विवाद पर पैरामाउंट की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई।
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क्या अमेरिकी न्यायिक व्यवस्था की आड़ में 'घूस को वैध बनाने की कोशिश'?
इस मुकदमे का एक पहलू यह भी है कि खुद को पैरामाउंट की शेयरधारक बताने वाली संस्था- फ्रीडम ऑफ दी प्रेस फाउंडेशन (FPF) ने दोनों पक्षों के बीच संभावित समझौते को कानूनी चुनौती देने का एलान किया है। FPF अमेरिका में प्रेस स्वतंत्रता से जुड़ी संस्था है। अदालत में मुकदमा दायर करने के संबंध में FPF के निदेशक सेठ स्टर्न ने कहा, इस समझौते से ऐसा आभास होता है कि अमेरिकी न्यायिक व्यवस्था की आड़ में 'घूस को वैध बनाने की कोशिश' हो रही है।