ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई
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ट्रंप ने ईरान के पाले में फेंकी गेंद
अमेरिका ने शनिवार-रविवार की दरमियानी रात ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के फोर्डो, इस्फहान और नतांज परमाणु स्थलों को निशाना बनाया गया था। इसके बाद ट्रंप ने कहा था कि ईरान को शांति स्थापित करनी चाहिए। ऐसा करके ट्रंप ने ईरान के पाले में गेंद फेंक दी है। अब अगर ईरान अमेरिकी हमलों का जवाब देता है तो ट्रंप कहानी बनाएंगे कि हमने युद्ध शुरू नहीं किया है और ईरान पर जवाबी हमले करेंगे।
हमलों के बाद ईरान का रुख
अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने कहा था कि हमलों की घटनाएं अपमानजनक हैं। इसके अनंत परिणाम होंगे। संयुक्त राष्ट्र के प्रत्येक सदस्य को इस बेहद खतरनाक, कानूनविरोधी और आपराधिक व्यवहार से चिंतित होना चाहिए।' वैश्विक समुदाय से इस पर ध्यान देने का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वाशिंगटन की ओर से की गई खतरनाक और कानूनविहीन कार्रवाइयों से संयुक्त राष्ट्र के प्रत्येक सदस्य को चिंतित होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत प्रावधानों का हवाला देते हुए अराघची ने यह भी कहा था कि ईरान के पास आत्मरक्षा का अधिकार है। वह इसके प्रयोग के लिए स्वतंत्र है। ईरान के पास ऐसे सभी विकल्प सुरक्षित हैं। पोस्ट में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर और इसके प्रावधानों के अनुसार जो आत्मरक्षा में वैध प्रतिक्रिया की अनुमति देते हैं, ईरान अपनी संप्रभुता, हित और लोगों की रक्षा के लिए सभी विकल्प सुरक्षित रखता है।
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ईरान पर अमेरिका का हमला
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ईरान का फोर्डो परमाणु केंद्र
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परमाणु नीति बदलने का भी अवसर और तीन बड़े फायदे
अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान को वैश्विक स्तर पर समर्थन मिला है। ट्रंप की कार्रवाई की आलोचना भी हो रही है। ऐसे में इस वक्त ईरान के पास अपनी परमाणु नीति बदलने का भी अवसर है। अब ईरान कह सकता है कि अमेरिकी हमलों के बाद उसकी यूरेनियम की आपूर्ति ध्वस्त हो गई है। इससे यह अस्पष्टता पैदा होगी कि ईरान के पास परमाणु हथियार बनाने की क्षमता है या नहीं। इन हालात में ईरान को तीन बड़े फायदे होंगे। पहला कि वह अमेरिका के साथ सीधे टकराव में देरी कर सकता है। दूसरा परमाणु पारदर्शिता से दूर जाने का अवसर दे सकता है और तीसरा युद्ध के बाद किसी भी वार्ता में लाभ प्रदान करता है।
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डोनाल्ड ट्रंप, राष्ट्रपति, अमेरिका
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ट्रंप की मुश्किल कैसे बढ़ रही
ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से ट्रंप की मुश्किलें बढ़ रही हैं। पूर्व अमेरिकियों राष्ट्रपतियों के युद्ध के फैसलों के खिलाफ ट्रंप मुखर रहे हैं। मगर ईरान पर हमले करके ट्रंप ने अपने ही बयान का विरोध किया है। इन हमलों के बाद ट्रंप को डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता घेर रहे हैं। इससे उनकी ही रिपब्लिकन पार्टी के अलग-थलग होने का जोखिम है। अगर ट्रंप ईरान को झुकाने में कामयाब हो जाते हैं तो वे जीत का दावा कर सकते हैं। अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो अमेरिका को संघर्ष पैदा करने का दोषी माना जाएगा। यह ट्रंप के लिए मुश्किल भरा होगा। क्योंकि हाल ही में पाकिस्तान ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए ट्रंप का समर्थन किया है। अगर युद्ध बढ़ता है तो यह ब्रांड ट्रंप के लिए बुरा होगा।