नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा के कुछ ही घंटे बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) पर प्रतिबंध लगा दिए। दक्षिण अफ्रीका की न्यायविद नवी पिल्लई इसी अदालत की अपील चैंबर में 2003 से 2008 तक न्यायाधीश रह चुकी हैं। अमेरिका की इस कार्रवाई से वॉशिंगटन और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका है। आईसीसी ने प्रतिबंधों की निंदा करते हुए कहा है कि उसकी जांच और मुकदमों का काम जारी रहेगा।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) पर प्रतिबंध लगाने का एलान किया। यह फैसला दक्षिण अफ्रीका की न्यायविद नवी पिल्लई को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद आया। पिल्लई 2003 से 2008 तक आईसीसी की अपील चैंबर में न्यायाधीश रह चुकी हैं। नोबेल पुरस्कार समिति ने भी अपने बयान में कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून की संस्थाओं और न्यायाधीशों पर राजनीतिक हमले हो रहे हैं। ऐसे समय में यह पुरस्कार एक अहम संदेश देता है।
अमेरिका ने आईसीसी पर प्रतिबंध क्यों लगाए?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिका के नागरिकों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की कार्रवाई को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। रुबियो के मुताबिक, अमेरिका आईसीसी के साथ लेनदेन पर रोक लगाएगा, ताकि उसके संसाधनों में कटौती हो और काम करने की क्षमता प्रभावित हो। ट्रंप प्रशासन लंबे समय से इस अदालत का विरोध करता रहा है। अमेरिका का कहना है कि अदालत की कुछ कार्रवाइयां उसके हितों के खिलाफ हैं। रुबियो ने यह भी कहा कि प्रतिबंधों की व्यवस्था इस तरह की गई है कि आईसीसी और उसके सदस्य देश अमेरिका की चिंताओं पर बातचीत कर सकें।
आईसीसी ने प्रतिबंधों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
आईसीसी की उप अभियोजक नजहत शमीम खान ने अमेरिकी प्रतिबंधों की निंदा की। उन्होंने कहा कि इन कदमों का मकसद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानून के शासन और एक स्वतंत्र न्यायिक संस्था के काम को कमजोर करना है। खान ने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधों के बावजूद अदालत अपना काम जारी रखेगी। उनके मुताबिक, जांच, मुकदमों और अन्य मामलों में न्यायालय की गतिविधियां जारी रहेंगी। आईसीसी युद्ध अपराध, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार जैसे गंभीर मामलों में कार्रवाई करने के लिए 2002 में स्थापित की गई थी। अदालत का मुख्य उद्देश्य ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराना है।
अमेरिका और आईसीसी के बीच विवाद की वजह क्या?
- माना जाता है कि अमेरिका ने इस अदालत की आलोचना खास तौर पर इस्राइली अधिकारियों के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को लेकर की है। इनमें इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी शामिल हैं। इसके अलावा, अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की गतिविधियों की जांच को लेकर भी दोनों के बीच विवाद रहा है।
- आईसीसी ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की कार्रवाई से जुड़ी अपनी पिछली जांच बंद कर दी थी। अमेरिका का कहना है कि अदालत को अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। ट्रंप प्रशासन पहले भी आईसीसी के कुछ अधिकारियों और न्यायाधीशों पर प्रतिबंध लगा चुका है। हालांकि, जो प्रतिबंध पहले लगाए गए थे, उन्हें राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल में हटा लिया गया था।
प्रतिबंधों का असर किन सेवाओं पर पड़ सकता है?
- अमेरिकी प्रतिबंध आम तौर पर अमेरिका में काम करने वाली कंपनियों को संबंधित संस्था के साथ कारोबार करने से रोक सकते हैं। इससे बैंकिंग, बीमा और सॉफ्टवेयर जैसी सेवाओं पर असर पड़ सकता है। आईसीसी के अधिकारियों ने ऐसे कदमों की आशंका को देखते हुए पहले से तैयारी की थी।
- अदालत ने अपने कार्यालयों में माइक्रोसॉफ्ट के सॉफ्टवेयर की जगह खुले स्रोत वाले विकल्प अपनाने और बैंकिंग तथा स्वास्थ्य बीमा के लिए दूसरे इंतजाम करने पर काम किया है। प्रतिबंधों की घोषणा के बाद अमेरिकी वित्त विभाग ने चार सामान्य लाइसेंस भी जारी किए। इनके तहत आईसीसी की दूरसंचार सेवाओं, सॉफ्टवेयर, पेंशन भुगतान और हिरासत में रखे गए लोगों से जुड़े कुछ लेनदेन को छूट दी गई है।
यूरोपीय देशों से अमेरिका क्या चाहता है?
अमेरिका चाहता है कि उसके सहयोगी देश आईसीसी पर अपनी चिंताओं को लेकर दबाव बनाएं। रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन ने प्रतिबंध लगाने से पहले अदालत और रोम संविधि के सदस्य देशों को समाधान निकालने का समय दिया था, लेकिन उसकी चिंताओं का समाधान नहीं हुआ।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आईसीसी ने अपनी कार्रवाई नहीं बदली, तो अमेरिका आगे और कदम उठा सकता है। रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि उसके सहयोगी देश अदालत पर लगाम लगाने के लिए कदम उठाएंगे। आईसीसी के रजिस्ट्रार ओसवाल्डो जावाला गिलेर ने भी यूरोपीय संघ से ऐसे उपायों के लिए तैयार रहने को कहा है, जिनसे यूरोपीय देशों को अमेरिकी प्रतिबंधों के बाहरी असर से बचाया जा सके।
नोबेल समिति ने नवी पिल्लई को पुरस्कार क्यों दिया?
नवी पिल्लई को शुक्रवार को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की घोषणा की गई। वह दक्षिण अफ्रीका की न्यायविद हैं और आईसीसी की अपील चैंबर में न्यायाधीश के तौर पर काम कर चुकी हैं। पुरस्कार समिति ने कहा कि न्यायाधीशों और अंतरराष्ट्रीय कानून की संस्थाओं पर राजनीतिक हमलों के समय यह पुरस्कार एक याद दिलाने वाला संदेश है। समिति के मुताबिक, ऐसी अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें युद्ध अपराध करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए और अत्याचार के पीड़ितों को न्याय मिले। समिति ने इसे शांतिपूर्ण दुनिया की एक जरूरी शर्त बताया।