अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग चलाने की मंजूरी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव से मिल गई है। अब ऊपरी सदन सीनेट में ट्रंप पर मुकदमा चलाया जाएगा। इसके साथ ही ट्रंप तीसरे ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति बन गए हैं जिनके खिलाफ महाभियोग लाया गया है।
जानकारों के अनुसार अमेरिका के ऊपरी सदन सीनेट में ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन को बहुमत प्राप्त है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि उन्हें राष्ट्रपति के पद से नहीं हटाया जाएगा।
अमेरिका के इतिहास में ट्रंप से पहले केवल दो राष्ट्रपतियों के खिलाफ महाभियोग लाया गया था, लेकिन उन्हें पद से हटाया नहीं जा सका। 1886 में एंड्रयू जॉनसन और 1998 में बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग लाया गया था।
निक्सन ने महाभियोग चलाने से पहले दिया था इस्तीफा
1974 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पर अपने एक विरोधी की जासूसी करने का आरोप लगा था। इसे वॉटरगेट स्कैंडल का नाम दिया गया था। लेकिन महाभियोग चलाने से पहले उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था।
ये हैं आरोप
डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप हैं कि उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडीमिर जेलेंस्की पर 2020 में डेमोक्रेटिक पार्टी के संभावित उम्मीदवार जो बाइडेन और उनके बेटे के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच के लिए दबाव बनाया है। बाइडेन के बेटे उक्रेन की एक ऊर्जा कंपनी में बड़े अधिकारी हैं।
महाभियोग प्रक्रिया के तहत ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडीमिर जेलेंस्की के बीच हुई फोन वार्ता की जांच हुई और डेमोक्रेटिक पार्टी के नियंत्रण वाली न्यायिक समिति ने उनके खिलाफ औपचारिक आरोप तय कर दिए हैं।
इस फोन वार्ता में राष्ट्रपति ट्रंप ने कथित तौर पर यूक्रेनी ऊर्जा कंपनी बुरिज्मा के लिए काम कर चुके जो बाइडेन और उनके बेटे हंटर बाइडेन के ख़िलाफ़ जांच करने के लिए कहा था।
न्यायिक समिति के चेयरमेन और डेमोक्रेटिक नेता जेरी नाडलेर के अनुसार ट्रंप के खिलाफ दो मुख्य आरोप हैं। पहला कि ट्रंप ने सत्ता का दुरुपयोग किया है और दूसरा ये कि राष्ट्रपति ने संसद के काम में बाधा डाली। राष्ट्रपति पर आरोप है कि उन्होंने अपने राजनीतिक लाभ के लिए यूक्रेन को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोक दिया था।