ट्रंप प्रशासन ने मंगलवार को एक नई घोषणा की। प्रशासन का कहना है कि वे उन अधिकारियों के यात्रा पर प्रतिबंध लगाएगा, जिनके बारे में यह दावा है कि वे दक्षिण अफ्रीका में गोरों और अन्य अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ भेदभाव के लिए जिम्मेदार हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा कि वह उन विदेशी नागरिकों के अमेरिकी वीजा रद्द कर देंगे या वीजा आवेदनों को अस्वीकार कर देंगे, जो दक्षिण अफ्रीका में अल्पसंख्यक जातीय और नस्लीय समूहों के खिलाफ बिना मुआवजे के भूमि अधिग्रहण, नस्ल-आधारित भेदभाव और हिंसा भड़काने की अनुमति देने वाले कानूनों और नीतियों को लागू करने या उनका पालन करने के लिए जिम्मेदार या इसमें शामिल पाए जाते हैं।
रुबियो ने एक बयान में कहा, 'अमेरिका इस तरह के व्यवहार को बेरोकटोक नहीं चलने देगा। ये कार्रवाइयां सीधे तौर पर शांति, आर्थिक स्थिरता और कानून के शासन को कमजोर करती हैं। ये अमेरिका की विदेश नीति के मूल सिद्धांतों के विपरीत हैं।'
दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने क्या कहा?
दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने श्वेत लोगों के खिलाफ भेदभाव के अमेरिकी आरोपों को दृढ़ता से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पिछले साल सत्ता में लौटने के बाद से प्रशासन की ओर से किए गए दावे निराधार और गलत सूचना का परिणाम हैं।
क्या अधिकारियों की पहचान हुई है?
रुबियो ने उन अधिकारियों की पहचान नहीं की जिन्हें यात्रा प्रतिबंधों के तहत निशाना बनाया जाएगा। हालांकि दक्षिण अफ्रीका में अल्पसंख्यक श्वेतों के एक लॉबी समूह ने पहले अमेरिका से अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस पार्टी के अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया था, जो दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा की पार्टी है और दक्षिण अफ्रीका की संसद में सबसे बड़ी पार्टी है।
दक्षिण अफ्रीका ने क्या दावा किया?
यह ट्रंप प्रशासन का दक्षिण अफ्रीका पर प्रतिबंध लगाने का ताजा कदम है। दक्षिण अफ्रीका का दावा है कि वहां की अश्वेत-नेतृत्व वाली सरकार गोरों, और खासकर अफ्रीकनर समुदाय के साथ भेदभाव कर रही है। अफ्रीकानर मुख्य रूप से डच और फ्रांसीसी औपनिवेशिक प्रवासियों के वंशज हैं, जो पहली बार 17वीं शताब्दी में दक्षिण अफ्रीका आए थे। वे दक्षिण अफ्रीका की पिछली नस्लीय भेदभाव प्रणाली के केंद्र में थे। दक्षिण अफ्रीका की 62 मिलियन आबादी में लगभग 45 लाख श्वेत लोग हैं, जिनमें ब्रिटिश या अन्य मूल के श्वेत लोग भी शामिल हैं।
अमेरिका ने किस कानून और नीतियों का हवाला दिया?
अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका में गोरों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोधी रुख के सबूत के तौर पर कुछ विवादित कानूनों और नीतियों का हवाला दिया है। इनमें दक्षिण अफ्रीका का वह विवादित कानून शामिल है, जो कुछ खास हालात में बिना किसी मुआवजे के इस्तेमाल न हो रही निजी जमीन को जब्त करने की इजाजत देता है। इसके साथ ही, अश्वेतों और अन्य लोगों के लिए अवसर बढ़ाने वाली 'अफरमेटिव एक्शन' (सकारात्मक कार्रवाई) नीतियां और गोरे किसानों के खिलाफ हिंसा की कुछ घटनाएं भी इसमें शामिल हैं।
ट्रंप प्रशासन ने दक्षिण अफ्रीका के उस कदम की भी कड़ी आलोचना की है, जिसमें उसने संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत में एक बेहद संवेदनशील मामले के तहत अमेरिकी सहयोगी इस्राइल पर गाजा में फिलिस्तीनियों के नरसंहार का आरोप लगाया है। इस्राइल इस आरोप का पुरजोर खंडन करता है।
दक्षिण अफ्रीका ने अपने नीतियों के बचाव में क्या बोला?
दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला ने बुधवार को कहा कि कुछ घरेलू नीतियां जिन्हें अमेरिका ने भेदभावपूर्ण करार दिया है। वे रंगभेद और उससे पहले के सैकड़ों वर्षों के औपनिवेशिक शासन के अन्याय को दूर करने के लिए बनाई गई थीं, जब अश्वेत लोगों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया गया था।
लामोला ने एक बयान में कहा, 'दक्षिण अफ्रीका इस बात का सम्मान करता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका कुछ नीतिगत उपायों और उनके कार्यान्वयन पर अलग-अलग विचार रख सकता है। दक्षिण अफ्रीका के लोग भी अमेरिकी लोगों के अपनी परिस्थितियों के अनुरूप कानून बनाने के अधिकार का सम्मान करते हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि संप्रभुता के सिद्धांत के अनुसार दक्षिण अफ्रीका के लोगों को भी वही सम्मान दिया जाएगा।'
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान, कथित श्वेत-विरोधी और अमेरिकी-विरोधी नीतियों के लिए अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ कई अन्य प्रतिबंध लागू किए हैं। इनमें इस वर्ष अमेरिका में आयोजित होने वाले ग्रुप ऑफ 20 आर्थिक समूह की बैठकों में दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों के प्रवेश पर रोक लगाना और दक्षिण अफ्रीका के एचआईवी उपचार कार्यक्रम के लिए दी जाने वाली सहायता को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना शामिल है।