अमेरिका में तीन नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव को लेकर पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट की तैयारियां हो चुकी हैं। रिपब्लिकन पार्टी की तरफ से जहां ट्रंप ने मुद्दे तैयार कर लिए हैं वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बिडेन ने भी राष्ट्रपति पर हमले की तैयारी कर ली है। इस बहस में न्यूयॉर्क टाइम्स की ट्रंप द्वारा टैक्स न भरने की रिपोर्ट ट्रंप के लिए बड़ी चुनौती बनेगी।
क्लीवलैंड में 90 मिनट तक चलने वाली यह बहस भारतीय समयानुसार बुधवार की सुबह करीब 6:30 बजे शुरू होगी। इसमें ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद 2016 और 2017 में सिर्फ 750 डॉलर का टैक्स अदा करने के अलावा कोरोना वायरस महामारी को लेकर उनके ढुलमुल रवैये पर भी चुनौती दी जाएगी। साथ ही देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था, बढ़ती बेरोजगारी, सुप्रीम कोर्ट में जज की नियुक्ति से संबंधित तीखे सवालों से भी ट्रंप को रूबरू होना पड़ेगा। दूसरी तरफ, डेमोक्रेटिक पार्टी के जो बिडेन को उनके बेटे द्वारा चीनी कंपनियों से मिलकर किए गए भ्रष्टाचार और डेमोक्रेटिक प्रत्याशी के ड्रग्स लेने का मुद्दा भी ट्रंप ने उठाने की कमर कस ली है। बता दें कि ट्रंप पहले भी बिडेन के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाते रहे हैं।
ट्रंप के साथ सुरक्षित है सिख समुदाय : रिपब्लिकन
डेमोक्रेटिक अभियान के तहत अमेरिका में सिखों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाने के बाद रिपब्लिकन खेमे ने कहा है कि अमेरिकी सिख ट्रंप प्रशासन में पूरी तरह से सुरक्षित हैं। सिख-अमेरिकी अटॉर्नी और ट्रंप के वकीलों के सह-अध्यक्ष हरमीत ढिल्लों ने कहा कि देश में धार्मिक आजादी ट्रंप की पहल के कारण है। इसी के चलते सिख युवक आज अपने पगड़ी और दाढ़ी के साथ अमेरिकी सेना में सेवा दे रहे हैं। ट्रंप अभियान के लिए सिखों के सह-अध्यक्ष जसदीप सिंह ने कहा कि बिडेन के समर्थक हमारे अभियान को खत्म करने की कोशिश में अनर्गल आरोप लगा रहा है।
ट्रंप की कोशिशों से निराश न हों : कमला हैरिस
अमेरिका में उप राष्ट्रपति पद की डेमोक्रेटिक प्रत्याशी कमला हैरिस ने उत्तरी कैरोलिना में संबोधित करते हुए कहा कि मतदाता चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट की सीट भरने की सरकारी कोशिशों से निराश न हों। हैरिस ने कहा, हम हार नहीं मानेंगे और हम पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा, हम उस बीमारी को नहीं फैलने देंगे जिसे ट्रंप ने फैलाने की कोशिश की है और जिसके चलते देश की राजनीति अपंग बन गई है। ट्रंप ने अमेरिकियों को एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा कर दिया है। वे अब यह बीमारी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में भी फैला रहे हैं।
वर्जीनिया के लेफ्टिनेंट गवर्नर की दौड़ में भारतीय-अमेरिकी पुनीत अहलूवालिया
भारतीय मूल के अमेरिकी उद्योगपति पुनीत अहलूवालिया (55) वर्जीनिया से लेफ्टिनेंट गवर्नर पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवारों में शामिल हो गए हैं। उन्होंने इस पद के लिए दावेदारी पेश करते हुए कहा, वर्जीनिया अभी मुश्किल में है और समय निकलता जा रहा है क्योंकि डेमोक्रेट पुराने वादे ही कर रहे हैं। दिल्ली में जन्मे अहलूवालिया 1990 में अमेरिका चले गए थे। उनकी पत्नी नादिया मूल रूप से अफगानिस्तान की हैं। अहलूवालिया उत्तरी वर्जीनिया रिपब्लिकन बिजनेस फोरम के लिए काम करते हैं और रिपब्लिकन पार्टी की स्थानीय इकाई के सक्रिय सदस्य हैं।