अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (आईसीसी) के उन कर्मचारियों के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक और पर्यटन संबंधी प्रतिबंध लगा दिए हैं जो आईसीससी के ये पता लगाने में मदद कर रहे हैं कि अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान में युद्ध जैसी स्थिति बना दी है।
ट्रंप के अधिकारियों ने एलान करते हुए कहा कि हैग आधारित न्यायालय अमेरिका की प्रभुता को तोड़ने की कोशिश कर रहा है, यही नहीं अमेरिका ने रूस पर मॉस्को के खात्मे पर गुमराह करने का आरोप लगाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि अगर हमारे लोगों को धमकाया जाएगा तो हम चुप नहीं रहेंगे।
इधर आईसीसी ने एक बयान में कहा है कि वॉशिंगटन के इस कदम से कोर्ट की न्यायिक प्रक्रिया और कानून व्यवस्था में बिना मंजूरी के दखल देने जैसा है। कर्मचारियों पर लगाए गए प्रतिबंधों में उन लोगों की अमेरिकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी जो आईसीसी की जांच में मदद कर रहे हैं। वहीं इन लोगों और इनके परिवार वालों को अमेरिका से बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
आईसीसी अभियोक्ता फाटो बेनसोदा 2003-14 के बीच हुए अपराधों की जांच करना चाहते थे। इसमें तालिबान की ओर से हुई बड़ी संख्या में हत्याएं, अफगान अधिकारियों की ओर से कैदियों की प्रताड़ना जैसे अपराध शामिल हैं। अमेरिकी सेना और सीआईए का अफगानिस्तान में फैलाव को लेकर जांच करना चाहते हैं।
आईसीसी ने 2017 में पहले अभियोजकों की जांच की जिसमें पता चला कि अफगानिस्तान में अपराधों की श्रेणी बढ़ गई है। वॉशिंगटन में मानवाधिकारों के निदेशक एंड्रआ परासो ने अमेरिका के फैसले पर हमला बोलते हुए कहा कि ये एक तरह से वैश्विक कानून को तोड़ने की कोशिश है।
साल 2002 में आईसीसी की स्थापना हुई थी, जिसका उद्देश्य मानवता के खिलाफ हो रहे अपराध, जनसंहार और युद्ध जैसे अपराधों की जांच करना है। ये कोर्ट तभी कार्रवाई करता है जब कोर्ट का सदस्य देश अपने यहां कार्रवाई करने में असमर्थ रहा हो। अमेरिका इस कोर्ट का कभी भी सदस्य नहीॆ रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से पहले अमेरिका जैसे विचार का प्रचार कर रहे हैं, इसी सिलसिले में डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन से अपना रिश्ता तोड़ने की बात कही है। आईसीसी कोर्ट में अफगानिस्तान सदस्य है लेकिन काबूल की ओर से दिए गए बयान में कहा गया है कि अपराधों को वो स्थानीय तौर पर सुलझा लेंगे।
अमेरिका में रहने वाले पूर्व वरिष्ठ वकील जॉन बेल्लिगर का कहना है कि लंबे समय से चल रहे अमेरिका और आईसीसी के बीच की टकराव नए मोड़ पर आ गई है। उन्होंने कहा कि ये कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि ट्रंप सरकार की ओर से धमकी भरे प्रतिबंध लगाए गए हैं और खासकर जब चुनाव पास हो।