क्यूबा की किन कंपनियों पर लगे नए प्रतिबंध?
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अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा की सरकारी कंपनियों और उससे जुड़े संगठनों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का फैसला किया है। अमेरिका के वित्त और विदेश विभाग ने क्यूबा की 10 सरकारी खनन, धातु और निर्माण कंपनियों के साथ क्यूबा इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेंडशिप विद द पीपल्स के नेतृत्व पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इसके साथ क्यूबा की यात्रा करने वाले अमेरिकी नागरिकों पर भी सरकारी या सरकार से जुड़ी कंपनियों के साथ कारोबार करने वाले नियमों को सख्ती से लागू किया जाएगा।
क्यूबा की किन कंपनियों पर लगे नए प्रतिबंध?
ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा की सरकारी क्षेत्र से जुड़ी 10 कंपनियों को नए आर्थिक प्रतिबंधों के दायरे में रखा है। इनमें खनन, धातु और निर्माण क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा क्यूबा इंस्टीट्यूट ऑफ फ्रेंडशिप विद द पीपल्स के नेतृत्व पर भी कार्रवाई की गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आरोप लगाया कि यह संगठन अमेरिका में एक ऐसे नेटवर्क को बढ़ावा देता है, जिसका उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों को क्यूबा की सरकार के पक्ष में प्रभावित करना और कट्टर बनाना है।
अमेरिका क्यूबा पर इतना दबाव क्यों बढ़ा रहा है?
ट्रंप प्रशासन लगातार हवाना पर आर्थिक और राजनीतिक दबाव बढ़ा रहा है। प्रशासन क्यूबा सरकार की गतिविधियों को अमेरिका के हितों के लिए चुनौती के रूप में देखता है। इसी वजह से आर्थिक प्रतिबंधों के साथ क्यूबा से जुड़े अमेरिकी नागरिकों पर भी नियमों का पालन कराने की कार्रवाई बढ़ाई जा रही है। अमेरिका का आरोप है कि क्यूबा की सरकार अपने विचारों और प्रभाव को अमेरिका तक पहुंचाने की कोशिश करती है। हालांकि क्यूबा इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
क्या क्यूबा पहले से ही आर्थिक संकट में है?
क्यूबा की अर्थव्यवस्था पहले से ही गंभीर संकट से गुजर रही है। अमेरिकी प्रतिबंधों और लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक प्रतिबंधों ने देश पर आर्थिक दबाव बढ़ाया है। क्यूबा को मिलने वाले मुफ्त तेल की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। इसके बाद द्वीपीय देश का आर्थिक संकट और गहरा गया है। अमेरिका ने क्यूबा पर तेल से जुड़ा दबाव उस कार्रवाई के बाद बढ़ाया, जिसमें वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाने के लिए अमेरिकी सैन्य अभियान का जिक्र किया गया है।
क्यूबा अमेरिका के प्रतिबंधों को लेकर क्या कहता है?
क्यूबा लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों और दशकों पुराने व्यापारिक प्रतिबंधों का विरोध करता रहा है। क्यूबा का आरोप है कि अमेरिकी प्रशासन विचारधारा और भौगोलिक स्थिति के कारण उसके लोगों को निशाना बनाते हैं। हवाना का कहना है कि प्रतिबंधों का असर केवल सरकार पर नहीं, बल्कि आम लोगों पर भी पड़ता है। क्यूबा अमेरिकी नीतियों को एक गरीब देश पर अनुचित दबाव के रूप में देखता है।
क्या नए प्रतिबंधों से बढ़ेगा तनाव?
नए प्रतिबंधों के बाद अमेरिका और क्यूबा के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है। ट्रंप प्रशासन आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए क्यूबा सरकार की आय और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को सीमित करना चाहता है। दूसरी ओर क्यूबा इन प्रतिबंधों को अपने खिलाफ लंबे समय से जारी अमेरिकी दबाव का हिस्सा मानता है। ऐसे में आने वाले समय में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव भी बढ़ने की आशंका है।