ट्रंप प्रशासन के डाक से मतदान वाले आदेश पर अदालत की रोक के बाद मामला और पेचीदा हो गया है। प्रशासन ने जज के फैसले के खिलाफ अपील की है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल योजना को प्रक्रिया के आधार पर आगे बढ़ने दिया है। ऐसे में 4 सितंबर से मतपत्र भेजे जाने से पहले क्या ट्रंप की योजना लागू हो पाएगी? पढ़िए रिपोर्ट
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने उस फैसले के खिलाफ अपील की है, जिसमें एक जज ने राष्ट्रपति के आदेश पर रोक लगा दी थी। इस आदेश में डाक के जरिये मतदान को लेकर कुछ नई शर्तें रखी गई थीं। यह मामला ऐसे समय अदालत पहुंचा है, जब मध्यावधि चुनाव के लिए कुछ राज्यों में 4 सितंबर से मतपत्र भेजे जाने हैं।
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शुक्रवार को इस फैसले के खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने अपील दायर की। इससे पहले बोस्टन की संघीय अदालत के जज ने ट्रंप के कार्यकारी आदेश पर अगले दो हफ्तों के लिए रोक लगा दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने पहले प्रक्रिया से जुड़े आधार पर इस योजना को आगे बढ़ने की अनुमति दी थी। लेकिन अदालत ने अभी यह फैसला नहीं किया है कि यह योजना कानूनी है या नहीं।
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ट्रंप के आदेश के मुताबिक, अमेरिकी डाक सेवा कुछ राज्यों के मतपत्र पहुंचाने से इनकार कर सकती थी। इसके लिए राज्यों को उन मतदाताओं की सूची देनी होगी, जो वोट देने के योग्य हैं। साथ ही मतपत्र भेजने के लिए एक तय तरह के लिफाफे का इस्तेमाल करना होगा।
जज ने क्यों लगाई रोक?
अमेरिकी जिला अदालत की जज इंदिरा तलवानी ने कहा कि राज्यों के पास नए मतपत्र तैयार करने और छापने के लिए पर्याप्त समय या पैसा नहीं है। उन्हें अपनी व्यवस्था में बदलाव करना होगा। साथ ही अधिकारियों को मतदाताओं की जानकारी डाक सेवा पर डालने के लिए प्रशिक्षण भी देना होगा।
व्हाइट हाउस ने इस योजना को 'सामान्य समझ वाले उपाय' बताया है। उसका कहना है कि इनका मकसद मतपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। आम चुनाव के लिए डाक से भेजे जाने वाले पहले मतपत्र 4 सितंबर को भेजे जाने हैं।