अमेरिका में ट्रांजिशन (सत्ता हस्तांतरण प्रक्रिया) में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के असहयोग से परेशान निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने अब आम जनता से चंदा देने की अपील की है। एक ट्विटर संदेश में उन्होंने कहा- ‘चूंकि राष्ट्रपति ट्रंप हार मानने से इनकार कर रहे हैं और ट्रांजिशन में देर कर रहे हैं, इसलिए हमें ये प्रक्रिया खुद पूरी करनी है। इसमें हमें आपके सहयोग की जरूरत है। अगर आप सक्षम हैं, तो बाइडन-हैरिस ट्रांजिशन के लिए चंदा दें।’
दरअसल, ट्रंप की जिद के कारण अमेरिका में अब बेसब्री बढ़ती जा रही है। ट्रंप के रुख को वहां के मेनस्ट्रीम मीडिया में तख्ता पलट की कोशिश बताया जाने लगा है। कुछ मीडिया चर्चाओं में ये सवाल भी उठाया गया है कि क्या इस रुख के लिए बाद में ट्रंप पर मुकदमा चलाया जा सकता है। इस बीच ट्विटर ने एलान कर दिया है कि ट्रंप हार मानें या नहीं, अगले 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति का ट्विटर हैंडल (@POTUS) बाइडन को दे दिया जाएगा।
इसके अलावा अन्य संबंधित ट्विटर हैंडल @whitehouse, @VP (उप-राष्ट्रपति), @FLOTUS (प्रथम महिला यानी राष्ट्रपति की पत्नी), और कई दूसरे सरकारी ट्विटर हैंडल भी नए प्रशासन को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे। ट्विटर कंपनी की टीम अगले कुछ दिनों में बाइडन-हैरिस टीम से मिलेगी और यह जानकारी हासिल करेगी नया प्रशासन किस रूप में ट्विटर हैंडल्स का इस्तेमाल करना चाहता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के ट्विटर अकांउंट के तीन करोड़ 20 लाख फॉलोवर हैं। ट्विटर के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रंप ने जो ट्वीट किए हैं, उन्हें आर्काइव में डाल दिया जाएगा। नए राष्ट्रपति को मिले हैंडल की शुरुआत शून्य ट्वीट से होगी। यानी उस पर बाइडन जो पहला ट्विट करेंगे, वहीं से ट्विटर हैंडल दिखना शुरू होगा। राष्ट्रपति ट्रंप के अपने निजी ट्विटर अकाउंट पर आठ करोड 90 लाख फॉलोवर हैं।
हाल में उनकी ट्विटर गतिविधि की ट्विटर कंपनी ने कड़ी निगरानी की है। बड़ी संख्या में उनके ट्विट्स को कंपनी यह कह कर फ्लैग कर दिया है कि उसमें कही गई बातें वेरिफाइड (सत्यापित) नहीं हैं। ट्विटर ने कहा है कि ट्रंप के राष्ट्रपति पद से विदा होने के बाद उनके ट्विटर हैंडल की कड़ी निगरानी जारी रहेगी।
इस बीच ट्रंप भले हार मानने को तैयार ना हों, लेकिन चुनाव नतीजों को पलटने की उनकी कोशिशों को लगातार धक्का लग रहा है। जैसे-जैसे राज्यों में चुनाव नतीजे को सर्टिफाइड करने की समयसीमा आती जा रही है, राष्ट्रपति के दावे कमजोर साबित होते जा रहे हैं। शुक्रवार को जॉर्जिया राज्य ने अपने चुनाव नतीजे को प्रमाणित कर दिया। इस तरह यहां हुई ट्रंप की हार पर आधिकारिक मुहर लग गई है।
मिशिगन राज्य सोमवार को अपने चुनाव परिणाम का प्रमाणपत्र जारी कर देगा। उसी रोज अरिजोना और पेंसिल्वेनिया राज्यों में भी चुनाव नतीजों को प्रमाणित किया जाएगा। इन सभी राज्यों के चुनाव नतीजों को ट्रंप ने चुनौती दी है। इन राज्यों में ट्रंप को हार का मुंह देखना पड़ा था। सोमवार को नतीजों के प्रमाणित होने के साथ इलेक्ट्रोरल कॉलेज में जो बाइडन के पक्ष में 270 सदस्य हो जाएंगे और उनकी जीत आधिकारिक तौर पर पक्की हो जाएगी।
वेबसाइट एक्सियोस.कॉम के मुताबिक शुक्रवार को ट्रंप टीम ने अदालतों में दायर याचिकाओं की स्थिति की समीक्षा की। इनमें पेंसिल्वेनिया में दायर याचिका भी है। ट्रंप टीम को अभी भी उम्मीद है कि इस याचिका पर कार्रवाई करते हुए कोर्ट पेंसिल्वेनिया में चुनाव नतीजे को प्रमाणित करने की प्रक्रिया पर रोक लगा सकता है। ट्रंप की रणनीति यह है कि अदालतें अगर कुछ निर्णायक राज्यों में ये प्रक्रिया रोक दें, तो फिर बात उन राज्यों की विधायिका के पास आ जाएगी, जहां रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है।
अमेरिकी कानून के मुताबिक अगर इलेक्ट्रोरल कॉलेज के सदस्यों के चुनाव में भ्रम के कारण देर हो रही हो, तो विधायिका अपनी तरफ से सदस्यों को मनोनीत कर सकती है। गौरतलब है कि ये प्रक्रिया 8 दिसंबर तक पूरी होनी जरूरी है। साल 2000 में ऐसी देर के कारण फ्लोरिडा राज्य में बिना मतगणना पूरी हुए इलेक्ट्रोरल कॉलेज के सदस्य तय कर दिए गए थे, जिसकी वजह से जॉर्ज डब्ल्यू बुश निर्वाचित हो सके।
ट्रंप कई दिनों से ह्वाइट हाउस से नहीं निकले हैं। बताया जाता है कि वहां से वे खुद उन तमाम कोशिशों का दिशा-निर्देश कर रहे हैं, जो उनकी टीम चुनाव नतीजे को बदलने के लिए जारी रख रही है।