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अंदरूनी कलह से जूझ रहा पाक, प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख बाजवा के बिगड़े संबंध

Sun, 19 May 2019 06:46 PM IST
Gaurav Pandey वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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पाक सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा और पाक प्रधानमंत्री इमरान खान - फोटो : फाइल
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा के संबंधों में सरकार चलाने के तौर तरीकों को लेकर खटास आ गई है। बाजवा को इमरान खान का खास परामर्शक माना जाता है और इमरान को सत्ता में लाने में बाजवा ने अहम भूमिका निभाई थी। 

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दि इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की राजनीति और सैन्य-नागरिक संबंधों के जानकार ने बताया कि सेना प्रमुख जनरल बाजवा इमरान खान की सरकार के प्रदर्शन और वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) के संचालन से खुश नहीं हैं। 

एक व्यक्ति ने बताया कि सेना मानती है कि हालांकि परवेज मुशर्रफ के राष्ट्रपति रहते हुए खुलेआम कई आतंकी संगठन संचालित हो रहे थे, लेकिन सेना को एफएटीएफ प्रतिबंधों का सामना नहीं करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि सेना को यह भी लगता है कि पहले लोगों के लापता होने और धार्मिक अल्पसंख्यकों से संबंधित कार्रवाइयों की वैश्विक स्तर पर कम आलोचना होती थी। 
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दोनों के बीच बढ़ते तनाव के बीच माना जा रहा है कि बाजवा ने हालिया कैबिनेट फेरबदल में अपने अधिकारों का इस्तेमाल किया है। जनरल बाजवा के इस कदम को ऐसे प्रयास के बारे में देखा जा रहा है कि इमरान को सत्ता से हटाकर सेना के पास लाई जाए।

सरकार में बाजवा का दखल

नए आंतरिक मंत्री ब्रिगेडियर इजाज शाह की तैनाती के बारे में भी माना जा रहा है कि शाह को जनरल बाजवा के आदेश पर ही यह पद दिया गया। मुशर्रफ के कार्यकाल में शाह इंटेलीजेंस ब्यूरो के निदेशक थे। शाह पर आरोप है कि इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस में रहते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी कार्रवाइयां कीं। 

जब मुशर्रफ ने शाह को ऑस्ट्रेलिया का उच्चायुक्त नियुक्त करने की कोशिश की तो आस्ट्रेलिया की सरकार ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने राजदूत की नियुक्ति को रोक दिया था। शाह पर अलकायदा प्रमुख और अमेरिका में हुए 9/11 हमलों के मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन को शरण देने में अहम भूमिका निभाने का भी आरोप था। साथ ही बेनजीर भुट्टो ने शाह पर उन्हें मारने की साजिश रचने वाला बताया था। 

पाकिस्तान में एक और विवादास्पद नियुक्ति नदीम बाबर की हुई। बाबर संसद के सदस्य नहीं हैं और इमरान खान की 47 सदस्यीय कैबिनेट में ऐसे 16 लोगों में से एक हैं। 

सरकार में बैठे लोगों का कहना है कि इमरान खान दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि वह सेना की कठपुतली नहीं हैं और न ही उन्हें ऐसे देखना चाहिए। जानकारी के मुताबिक इमरान खान ने अलग-अलग तरीकों से जनरल बाजवा की खिलाफत शुरू कर दी है, जो कि आने वाले दिनों में नागरिक-सेना-सरकार संबंधों को और बिगाड़ सकते हैं। 

कई बार इमरान ने बाजवा को किया नजरअंदाज

2 मई को जब प्रधानमंत्री इमरान खान मोहमंद बांध का उद्धाटन करने जा रहे थे, तब जनरल बाजवा ने उनसे साथ चलने का अनुरोध किया था। लेकिन, खान ने कई कार्यक्रमों के होने का हवाला देते हुए बाजवा के इस आग्रह को नकार दिया था और अकेले जाने का निर्णय लिया था।  

कार्यक्रम पूरा होने के बाद बाजवा ने इमरान से फिर अनुरोध किया कि कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार करने के लिए वह पेशावर तक उनके विमान में चलें। लेकिन, खान ने फिर अन्य कार्यक्रम होने का कारण बताते हुए उनके साथ जाने से इनकार कर दिया था। 

हाल ही में जनरल बाजवा ने इमरान खान से अनुरोध किया था कि वह विपक्ष के लिए समाधानकारी संकेत दें। हालांकि, इमरान ने विपक्ष की आलोचना की और किसी तरह के सकारात्मक संकेत देने से इनकार कर दिया। 
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इमरान पर दबाव बनाने को अमेरिका की ओर देख रहे बाजवा

जानकारी के मुताबिक बाजवा को नवंबर में सेवानिवृत्त होना है और वह अपने कार्यकाल में वृद्धि चाहते हैं। इसको लेकर इमरान खान पर दबाव बनाने के लिए वह अमेरिका से मदद की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि एक अफवाह यह भी उड़ रही है कि बाजवा ने सेवा विस्तार का फैसला रद्द कर दिया है। 

जानकारी के अनुसार पूर्व पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल रहील शरीफ के नक्शेकदम पर चलते हुए जनरल बाजवा इस्लामिक आर्मी कमांड का नेतृत्व करने के लिए सऊदी अरब का रुख भी कर सकते हैं। सऊदी का कार्य वित्तीय रूप से आकर्षक है और सेना की कमान से बाहर निकलने के लिए बेहतर तरीका हो सकता है। 

पिछली पाक सेना कोर कमांडरों की बैठक में, कमांडरों ने बाजवा को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि उनके सेवानिवृत्त होने से पहले वर्तमान व्यवस्था (सैन्य-नागरिक) बेहतर हालात में आ जाए। 
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