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नार्वे में पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि, जलाईं मशालें-लहराईं तख्तियां

Fri, 22 Feb 2019 07:03 PM IST
Gaurav Pandey ओस्लो से सुरेशचंद्र शुक्ल 'शरद आलोक'
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नार्वे में पुलवामा के शहीदों को श्रद्धांजलि
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22 फरवरी, ओस्लो में ढंडक थी और अंधेरा था। एक ओर पार्लियामेंट और दूसरी और ग्रांड होटल स्थित है जहां नोबेल पुरस्कार विजेता और विशिष्ट मेहमान ठहरते हैं। तभी पौने छह बजे पार्लियामेंट के सामने आइदस्वोल प्लस पर बच्चे, युवा और जवान एकत्र होने लगे। एक बड़े और फ्रेम में लगे पोस्टर में जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हुए भारतीय जवानों के चित्र लगे थे उसे एक मेज पर रख दिया गया था और सामने फूल रखे थे।

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देखते ही देखते लगभग पांच मिनट में ही बहुत सी मशालें जल उठीं। हाथों में तख्तियां लहराने लगीं, जिनमें लिखा था कि 'आतंकवाद का कोई चेहरा नहीं', 'आतंक कोई समस्या हल नहीं' आदि, आदि। यह प्रदर्शन किसी संस्था की तरफ से नहीं वरन यहां रहने वाले सभी भारतीयों की तरफ से था। इसमें हर शहीद का नाम पुकारा जाता और एक भारतीय का नाम पुकारा जाता और वह एक गुलाब का फूल चढ़ाता और उस शहीद को हाथ जोड़कर सलामी देकर श्रद्धांजलि अर्पित करता।
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यहां उपस्थित दो सौ लोगों ने एक अपील पर हस्ताक्षर किए जिसमें नार्वे की सरकार से आतंकवादी हमले के जिम्मेदार लोगों को दंड दिलाने की मांग की गई थी। यह अपील भारतीय मूल के सांसद हिमांशु गुलाटी को सौंपी गई, जिन्होंने इसे नार्वे के विदेशमंत्री तक पहुंचाने का वायदा किया।
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नार्वे में रहने वाले भारतीय लोग भारत में होने वाली घटनाओं से बहुत प्रभावित होते हैं। यह श्रद्धांजलि सभा उसका एक उदाहरण थी। विदेश में जाकर भारतीय अधिक भारतीय हो जाते हैं जिस पर हम गर्व करते हैं।

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