हादसे में जान गंवाने वाले लोग
- फोटो : अमर उजाला
टाइटन पनडुब्बी की खासियतें
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क्या थी टाइटन पनडुब्बी और इसकी खासियतें
टाइटन एक रिसर्च और सर्वे के काम में इस्तेमाल होने वाली पनडुब्बी थी, जिसमें चालक समेत पांच लोगों के बैठने की क्षमता थी। इसके अलावा लोगों को समुद्र की गहराई तक पर्यटन कराने के लिए भी पनडुब्बी का इस्तेमाल किया जाता था। टाइटैनियम और कार्बन फाइबर की बनी इस पनडुब्बी का ढांचा 22 फीट लंबा था और इसका वजन करीब 10,432 किलो था। यह पनडुब्बी 4000 मीटर की गहराई तक जाने में सक्षम थी। इस पनडुब्बी का प्रबंधन करने वाली कंपनी ओशनगेट का कहना है कि इस पनडुब्बी का व्यूपोर्ट इतनी गहराई तक जाने वाली पनडुब्बियों में सबसे बड़ा था।
इस पनडुब्बी में चार इलेक्ट्रिक थर्स्टर्स लगे थे, जो पनडुब्बी को दिशा और 3 नॉट की गति से चलने में मदद करते थे। पनडुब्बी का प्रेशर वेसल भी कार्बन फाइबर और टाइटैनियम का बना था, जिसमें 96 घंटे की ऑक्सीजन भरी होती थी। इस पनडुब्बी में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक सैटेलाइट टेक्नोलॉजी का कम्युनिकेशन सिस्टम लगा हुआ था। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि पनडुब्बी का कम्युनिकेशन किन कारणों से टूटा। पनडुब्बी के हादसे की अन्य वजह इसमें पावर फेलियर या सब-कम्युनिकेशन सिस्टम की दिक्कत हो सकती है।