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North Korea: किम जोंग उन की जोकर जैसी छवि एक मजबूत ढाल है उत्तर कोरिया की?

Wed, 19 Oct 2022 07:18 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सिओल

सार

North Korea: उत्तर कोरिया ने पिछले 15 दिनों में ऐसी कई मिसाइलें दागी हैं, जिनके जरिए परमाणु हथियार दागे जा सकते हैं। इनमें से कुछ मिसाइलें जापान के ऊपर से होते हुए प्रशांत महासागर में जाकर गिरीं। ये मिसाइलें उतनी दूरी तय करने में सक्षम दिखीं, जिससे उत्तर कोरिया गुआम द्वीप पर स्थित अमेरिकी सैनिक अड्डे को निशाना बना सकता है...
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North Korea: मिसाइल लॉन्च के दौरान किम जोंग उन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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उत्तर कोरिया के कारण पैदा हो रहे खतरे को अब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अधिक गंभीरता से लिया जा रहा है। दक्षिण कोरिया और जापान जैसे देशों में यह राय मजबूत हुई है कि पश्चिमी देशों को भी इस खतरे को गंभीरता से लेना चाहिए। पश्चिम का ध्यान अभी मोटे तौर पर यूक्रेन संकट पर है। इस क्षेत्र में माना जा रहा यूक्रेन पर ध्यान होने के कारण अमेरिका और उसके सहयोगी देश उत्तर कोरिया की तरफ पूरा ध्यान नहीं दे रहे हैं।

उत्तर कोरिया ने पिछले 15 दिनों में ऐसी कई मिसाइलें दागी हैं, जिनके जरिए परमाणु हथियार दागे जा सकते हैं। इनमें से कुछ मिसाइलें जापान के ऊपर से होते हुए प्रशांत महासागर में जाकर गिरीं। ये मिसाइलें उतनी दूरी तय करने में सक्षम दिखीं, जिससे उत्तर कोरिया गुआम द्वीप पर स्थित अमेरिकी सैनिक अड्डे को निशाना बना सकता है। बीते दस अक्तूबर को उत्तर कोरिया ने अपना 77वां स्थापना दिवस मनाया। उस रोज उत्तर कोरियाई मीडिया ने खबर दी कि देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने देश की परमाणु क्षमता का निजी तौर पर मुआयना किया है। इस दौरान किम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि उनके परमाणु हथियार दुश्मन पर ‘हमला करने और उसका सफाया’ करने में सक्षम हैं।

विश्लेषकों ने कहा है कि रूस की तुलना में उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता बहुत कम है। इसके बावजूद उससे संभावित खतरों की अनदेखी नहीं की जा सकती। अमेरिका की टुफ्ट्स यूनिवर्सिटी में कोरियाई अध्ययन विषय के प्रोफेसर सुंग यून ली कहा है कि पश्चिमी देशों में आम तौर पर किम जोंग उन की छवि एक विदूषक की है। इसलिए उनकी बातों को वहां गंभीरता से नहीं लिया जाता है। जबकि हकीकत यह है कि किम की परमाणु महत्त्वाकांक्षाएं बाकी दुनिया के लिए खतरनाक हैं।

इस साल उत्तर कोरिया की गतिविधियां अधिक खतरनाक हो गई हैं। गुजरे साढ़े नौ महीनों वह 30 मिसाइलें दाग चुका है। पिछले महीने उत्तर कोरिया के बारे में संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञ समिति ने इन परीक्षणों को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का खुला उल्लंघन बताया था। इसके बावजूद इस वर्ष अब तक उत्तर कोरिया के बारे में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक भी निंदा प्रस्ताव पारित नहीं किया है।

वेबसाइट एशिया टाइम्स पर छपी एक रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य रूस और चीन अकसर वहां उत्तर कोरिया का समर्थन करते हैं। इसलिए इस बात की संभावना कम है कि अगर सुरक्षा परिषद में कोई निंदा प्रस्ताव लाया भी गया, तो वह पारित हो पाएगा।

उत्तर कोरिया ने पिछले महीने ‘परमाणु शक्ति के बारे में राजकीय नीति’ संबंधी कानून लागू किया। इसमें उन स्थितियों का विवरण दिया गया है, जब उत्तर कोरिया परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस कानून की भाषा भ्रामक रखी गई है। इसमें कहा गया है कि ‘युद्ध में बढ़त बनाने के लिए’ ऐसा किया जा सकता है। इस क्षेत्र के विश्लेषकों का कहना है कि इस कानून के पारित होने के बाद दुनिया के कान खड़े हो जाने चाहिए थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

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