इससे पहले हांगकांग के शिक्षा सचिव केविन येंग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि छात्र स्कूलों में ही रहेंगे। स्कूलों का राजनीतिक पूर्ति के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘हम यह सुनिश्चित करेंगे की स्कूलों में शांति बनी रहे और इसका इस्तेमाल प्रदर्शन या आंदोलन के लिए कतई न हो। स्कूल छात्रों की पढ़ाई की जगह है और उसका उसी रूप में इस्तेमाल होना चाहिए।’ वहीं, प्रशासन सचिव मैथ्यू चेउंग किंग-चुंग ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को हिंसा रोकनी होगी। इसके बाद ही कोई वार्ता संभव हो सकती है।
प्रदर्शनकारी महिलाओं को मिली दुष्कर्म की धमकी
इस बीच, हांगकांग में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल हो रहीं महिलाओं ने दुष्कर्म की धमकी मिलने और सोशल मीडिया पर चीनी सोशल मीडिया यूजर्स की ओर से ट्रोल किए जाने का आरोप लगाया है। लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन का हिस्सा रही 17 वर्षीय मिकी लुआंग हो वुन ने कहा, ‘मुझ पर मेरे विचारों या अन्य वजहों से हमला नहीं कर किया जा रहा, बल्कि वे इसलिए हमला कर रहे हैं क्योंकि मैं महिला हूं।’ एक और महिला प्रदर्शनकारी यायू हो ने बताया कि सोशल मीडिया पर उन्हें चीन समर्थक यूजर्स निशाना बना रहे हैं। मुझे दुष्कर्म की धमकियां दी जा रही हैं। प्रदर्शन की फर्जी तस्वीरें शेयर की जा रही हैं।
हांगकांग में प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग को लेकर संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका चिंता जता चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि प्रदर्शनकारियों पर बल का प्रयोग नहीं होना चाहिए। इस पर चीन ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि यह उसका आंतरिक मामला है और इसमें बाहरी देश का दखल उसे मंजूर नहीं।
हेलीकॉप्टर से चमकीले पाउडर का छिड़काव
इस बीच, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन में हिस्सा लेने लोगों पर हेलीकॉप्टर से चमकीले पाउडर का छिड़काव कराया। इससेे पहले प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले और नीले पीने की बौछारें की गईं। चमकीले पाउडर का छिड़काव और नीले पानी की बौछार का मकसद बाद में प्रदर्शनकारियों की आसानी से पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करना है।
छात्रों में चीन विरोधी भावनाएं बढ़ने से चीन परेशान
हांगकांग में हाईस्कूल के छात्र अब लोकतंत्र और सामाजिक अधिकारों की खुलकर चर्चा करने लगे हैं। इसको लेकर चीन की चिंता बढ़ती जा रही है। बीजिंग का आरोप है कि हांगकांग के माध्यमिक स्कूलों में चीन विरोधी कोर्स पढ़ाया जा रहा है। इससे छात्रों में चीन विरोधी भावनाएं तेज हो रही हैं। चीन इस बात को लेकर भी चिंतित है कि छात्र अब तेजी से नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं। इसके लिए चीन सीधे तौर पर उदारवादी पाठ्यक्रमों को जिम्मेदार ठहरा रहा है।