कोरोनावायरस के कोहराम के बीच चीन ने फिर से दावा किया है कि वह इसकी दवा ढूंढने के काफी करीब पहुंच रहा है। चीन का कहना है कि मलेरिया के इलाज में उपयोग की जाने वाली दवा कोरोनावायरस से लड़ने में भी कारगर साबित हो रही है।
चीन के विज्ञान व तकनीकी मंत्रालय के उप निदेशक सुन यानरोंग का कहना है कि 'क्लोरोक्वाइन फासफेट' नाम की दवा कोरोनवायरस के क्लीनिकल इलाज की दवा बन गई है। उन्होंने दावा किया है कि अभी तक इसके कोई साइड इफेक्ट नजर नहीं आए हैं।
इसके अलावा चीन की विज्ञान अकादमी की महासचिव झोउ क्वी ने कहा कि हम वैज्ञानिक प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहे हैं और अभी तक COVID19 वायरस वैक्सीन और एंटीबॉडी रिसर्च को प्रभावित नहीं कर रहा है।
इससे पहले भी चीन ने कोरोनावायरस का वैक्सीन तैयार करने का दावा किया है। हाल में उसने दावा किया था कि उसने कोरोनावायरस (कोविड-19) से बचने के लिए एक वैक्सीन खोज निकाली है।
बताया गया कि इस वैक्सीन को चीनी सेना की उसी मेजर जनरल की टीम ने ईजाद किया है, जिन्होंने कुछ साल पहले एसएआरएस (सार्स) और इबोला जैसे खतरनाक वायरस से बचने की वैक्सीन बनाई थी। बताया गया था कि चीनी सेना की मेडिकल टीम एक महीने से वुहान में इस वैक्सीन को तैयार करने में लगी थी। कोरोनावायरस ने करीब 80 देशों को अपनी चपेट में ले लिया है। चीन के वुहान प्रांत से फैले इस वायरस से 95 हजार से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 3000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।