हर बुधवार को जब टिफैनी श्रॉवेन के दोस्त काम में लगे होते हैं, वह टेनिस कोर्ट पर बैकहैंड की प्रैक्टिस कर रही होती हैं। मेलबर्न की प्रोजेक्ट मैनेजर सुबह नौ बजे अपने लिए एक अभ्यास सत्र रखती हैं जिससे उनका खेल निखर रहा है। श्रॉवेन कामचोरी नहीं करतीं। लगभग एक साल से वेर्सा नाम की जिस डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी में वह काम करती हैं, वह बुधवार को बंद रहती है।
ये कंपनी अपने कर्मचारियों से हफ्ते के चार दिन ही काम लेती है, मगर पैसे पूरे 5-दिन के सप्ताह के हिसाब से देती है। वेर्सा के कर्मचारी सोमवार और मंगलवार को काम करते हैं, फिर गुरुवार-शुक्रवार को दो दिन के लिए ऑफिस आते हैं। बुधवार को कोई मीटिंग नहीं रखी जाती। लेकिन किसी ग्राहक को कोई जरूरी काम हो तो कंपनी के कर्मचारी फोन पर उपलब्ध रहते हैं।
श्रॉवेन को जब पहली बार इस योजना के बारे में बताया गया था तो वह चहक उठी थी, फिर उनको चिंता भी हो गई थी। प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में वह कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच की कड़ी हैं। इसलिए कोई डेडलाइन छूटने पर या दोनों पक्षों के बीच संवाद टूटने पर सारा ठीकरा उन्हीं के सिर फूटता। लेकिन वेर्सा के कर्मचारियों ने कुशलता बढ़ाने के लिए काम करने के अपने ढंग को बदल लिया।
वेर्सा ने ये नीति पिछले साल जुलाई में लागू की थी। इस ऑस्ट्रेलियाई कंपनी की संस्थापक और सीईओ काथ ब्लैकहैम का कहना है कि इस बीच कंपनी का राजस्व 46 फीसदी बढ़ा है और मुनाफा लगभग तीन गुना हो गया है। ब्लैकहैम इस कामयाबी का पूरा श्रेय 4-दिवसीय सप्ताह को नहीं देना चाहतीं। वो कहती हैं, "हमें काम मिला क्योंकि हम अच्छे काम के लिए जाने जाते हैं।"
वो ये भी कहती हैं कि एजेंसी का टर्नओवर बहुत कम है और निर्देशों पर काम करने वाली टीमें व्यापारिक भागीदारों को आकर्षित कर सकती हैं। ब्लैकहैम को अपनी कंपनी की लीडरशिप टीम को इस बात के लिए मनाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। बुधवार की छुट्टी का प्रयोग नाकाम होने पर उन्होंने 5-दिवसीय सप्ताह में लौटने की कसम भी खाई थी।