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ऑस्ट्रेलिया की ये कंपनी अपने कर्मचारियों को देती है बुधवार की छुट्टी

बीबीसी, हिंदी Published by: Shilpa Thakur Updated Thu, 09 May 2019 03:32 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com

हर बुधवार को जब टिफैनी श्रॉवेन के दोस्त काम में लगे होते हैं, वह टेनिस कोर्ट पर बैकहैंड की प्रैक्टिस कर रही होती हैं। मेलबर्न की प्रोजेक्ट मैनेजर सुबह नौ बजे अपने लिए एक अभ्यास सत्र रखती हैं जिससे उनका खेल निखर रहा है। श्रॉवेन कामचोरी नहीं करतीं। लगभग एक साल से वेर्सा नाम की जिस डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी में वह काम करती हैं, वह बुधवार को बंद रहती है।

ये कंपनी अपने कर्मचारियों से हफ्ते के चार दिन ही काम लेती है, मगर पैसे पूरे 5-दिन के सप्ताह के हिसाब से देती है। वेर्सा के कर्मचारी सोमवार और मंगलवार को काम करते हैं, फिर गुरुवार-शुक्रवार को दो दिन के लिए ऑफिस आते हैं। बुधवार को कोई मीटिंग नहीं रखी जाती। लेकिन किसी ग्राहक को कोई जरूरी काम हो तो कंपनी के कर्मचारी फोन पर उपलब्ध रहते हैं।

काम पूरा कैसे हो

श्रॉवेन को जब पहली बार इस योजना के बारे में बताया गया था तो वह चहक उठी थी, फिर उनको चिंता भी हो गई थी। प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में वह कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच की कड़ी हैं। इसलिए कोई डेडलाइन छूटने पर या दोनों पक्षों के बीच संवाद टूटने पर सारा ठीकरा उन्हीं के सिर फूटता। लेकिन वेर्सा के कर्मचारियों ने कुशलता बढ़ाने के लिए काम करने के अपने ढंग को बदल लिया।



श्रॉवेन ध्यान रखती हैं कि कुछ निश्चित काम बुधवार के ब्रेक से पहले पूरे हो जाएं। बैठकें ज्यादा केंद्रित होती हैं और फालतू की चटर-पटर को बढ़ावा नहीं दिया जाता। हर दो हफ्ते में कंपनी देखती है कि क्या काम हुआ और क्या नहीं हुआ। श्रॉवेन कहती हैं, "सभी की कोशिश रहती है कि कि ये (व्यवस्था) काम करे क्योंकि हमें ये लचीलापन पसंद है। यदि मैं बुधवार को छुट्टी चाहती हूं तो मुझे अपने हफ्ते की योजना बेहतर बनानी होगी।"

लचीलेपन की जरूरत का सम्मान

वेर्सा ने ये नीति पिछले साल जुलाई में लागू की थी। इस ऑस्ट्रेलियाई कंपनी की संस्थापक और सीईओ काथ ब्लैकहैम का कहना है कि इस बीच कंपनी का राजस्व 46 फीसदी बढ़ा है और मुनाफा लगभग तीन गुना हो गया है। ब्लैकहैम इस कामयाबी का पूरा श्रेय 4-दिवसीय सप्ताह को नहीं देना चाहतीं। वो कहती हैं, "हमें काम मिला क्योंकि हम अच्छे काम के लिए जाने जाते हैं।"

वो ये भी कहती हैं कि एजेंसी का टर्नओवर बहुत कम है और निर्देशों पर काम करने वाली टीमें व्यापारिक भागीदारों को आकर्षित कर सकती हैं। ब्लैकहैम को अपनी कंपनी की लीडरशिप टीम को इस बात के लिए मनाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। बुधवार की छुट्टी का प्रयोग नाकाम होने पर उन्होंने 5-दिवसीय सप्ताह में लौटने की कसम भी खाई थी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com
हर बुधवार को जब टिफैनी श्रॉवेन के दोस्त काम में लगे होते हैं, वह टेनिस कोर्ट पर बैकहैंड की प्रैक्टिस कर रही होती हैं। मेलबर्न की प्रोजेक्ट मैनेजर सुबह नौ बजे अपने लिए एक अभ्यास सत्र रखती हैं जिससे उनका खेल निखर रहा है। श्रॉवेन कामचोरी नहीं करतीं। लगभग एक साल से वेर्सा नाम की जिस डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी में वह काम करती हैं, वह बुधवार को बंद रहती है।

ये कंपनी अपने कर्मचारियों से हफ्ते के चार दिन ही काम लेती है, मगर पैसे पूरे 5-दिन के सप्ताह के हिसाब से देती है। वेर्सा के कर्मचारी सोमवार और मंगलवार को काम करते हैं, फिर गुरुवार-शुक्रवार को दो दिन के लिए ऑफिस आते हैं। बुधवार को कोई मीटिंग नहीं रखी जाती। लेकिन किसी ग्राहक को कोई जरूरी काम हो तो कंपनी के कर्मचारी फोन पर उपलब्ध रहते हैं।

काम पूरा कैसे हो

श्रॉवेन को जब पहली बार इस योजना के बारे में बताया गया था तो वह चहक उठी थी, फिर उनको चिंता भी हो गई थी। प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में वह कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच की कड़ी हैं। इसलिए कोई डेडलाइन छूटने पर या दोनों पक्षों के बीच संवाद टूटने पर सारा ठीकरा उन्हीं के सिर फूटता। लेकिन वेर्सा के कर्मचारियों ने कुशलता बढ़ाने के लिए काम करने के अपने ढंग को बदल लिया।

श्रॉवेन ध्यान रखती हैं कि कुछ निश्चित काम बुधवार के ब्रेक से पहले पूरे हो जाएं। बैठकें ज्यादा केंद्रित होती हैं और फालतू की चटर-पटर को बढ़ावा नहीं दिया जाता। हर दो हफ्ते में कंपनी देखती है कि क्या काम हुआ और क्या नहीं हुआ। श्रॉवेन कहती हैं, "सभी की कोशिश रहती है कि कि ये (व्यवस्था) काम करे क्योंकि हमें ये लचीलापन पसंद है। यदि मैं बुधवार को छुट्टी चाहती हूं तो मुझे अपने हफ्ते की योजना बेहतर बनानी होगी।"

लचीलेपन की जरूरत का सम्मान

वेर्सा ने ये नीति पिछले साल जुलाई में लागू की थी। इस ऑस्ट्रेलियाई कंपनी की संस्थापक और सीईओ काथ ब्लैकहैम का कहना है कि इस बीच कंपनी का राजस्व 46 फीसदी बढ़ा है और मुनाफा लगभग तीन गुना हो गया है। ब्लैकहैम इस कामयाबी का पूरा श्रेय 4-दिवसीय सप्ताह को नहीं देना चाहतीं। वो कहती हैं, "हमें काम मिला क्योंकि हम अच्छे काम के लिए जाने जाते हैं।"

वो ये भी कहती हैं कि एजेंसी का टर्नओवर बहुत कम है और निर्देशों पर काम करने वाली टीमें व्यापारिक भागीदारों को आकर्षित कर सकती हैं। ब्लैकहैम को अपनी कंपनी की लीडरशिप टीम को इस बात के लिए मनाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। बुधवार की छुट्टी का प्रयोग नाकाम होने पर उन्होंने 5-दिवसीय सप्ताह में लौटने की कसम भी खाई थी।

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com
उन्होंने दो छोटे-छोटे बच्चों के साथ कंपनी की शुरुआत की थी। वो ऐसी कंपनी का नेतृत्व करना चाहती थीं जिसका प्रदर्शन बेहतरीन हो, साथ ही जो लचीलेपन की जरूरत का सम्मान करे। ब्लैकहैम कहती हैं, "मैं साबित करना चाहती थी कि कई-कई घंटों तक लगातार काम करने वाले युवाओं के लिए जाने वाले सेवा आधारित उद्योग में भी यह कामयाब हो सकता है।"

सप्ताह के बीच में मिलने वाली छुट्टी में कर्मचारी जिम जा सकते हैं, घर के काम निपटा सकते हैं, छोटे बच्चों की देखभाल कर सकते हैं, मुलाकातें तय कर सकते हैं, अपने स्टार्ट-अप पर काम कर सकते हैं या चाहें तो बस नेटफ्लिक्स देख सकते हैं। ब्लैकहैम कहती हैं, "सिक लीव कम हो गए हैं, कर्मचारियों की संतुष्टि बढ़ गई है। सोमवार वाली फीलिंग सप्ताह में दो बार महसूस होती है।"

बुधवार ही क्यों?

सप्ताह को दो हिस्सों में बांटने के फैसले के पीछे काम में सोमवार वाली फीलिंग लाने का बड़ा हाथ है। ब्लैकहेम तीन दिन का लंबा वीकेंड नहीं देना चाहती थीं, क्योंकि उनको डर था कि युवा कर्मचारी इसे और लंबे वीकेंड में बदलने की कोशिश करने लगेंगे। अपनी छुट्टी का दिन तय करने का अधिकार कर्मचारियों को देने से दूसरे कर्मचारियों और ग्राहकों में भ्रम बनने लगा था कि कौन उपलब्ध होगा और कौन नहीं। इससे उत्पादकता भी प्रभावित हुई।

ऑकलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में एचआर मैनेजमेंट के प्रोफेसर जरॉड हैर ने अपने रिसर्च के लिए वेर्सा के कर्मचारियों से बात की और पाया कि वे बुधवार की छुट्टी का सबसे ज्यादा आनंद लेते हैं। वो कहते हैं, "बुधवार की छुट्टी का मतलब है कि आप गुरुवार को तरोताजा होकर आएंगे और उनकी उत्पादकता बढ़ेगी।"

प्रोफेसर हैर ने न्यूजीलैंड की इस्टेट मैनेजमेंट कपंनी पर्पेचुअल गार्डियन पर भी निगाह रखी है। इस कंपनी ने पिछले साल 4-दिवसीय सप्ताह का प्रयोग किया था और उत्पादकता में कोई कमी नहीं आई। बीमारी वाली छुट्टियां कम हो गई थीं और कर्मचारियों की खुशी बढ़ गई थी, हालांकि कुछ कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी जो काम के नए तरीके में फिट नहीं हो पा रहे थे। 

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com

बदलाव का समय आ गया है

पर्पेचुअल गार्डियन के मालिक और सीईओ एंड्रयू बार्न्स का मानना है कि 4 दिवसीय सप्ताह का समय आ गया है। वेर्सा की ब्लैकहैम ने दफ्तर को लचीला और संतुलित बनाने के लिए इसे अपनाया है तो बार्न्स एक अध्ययन से प्रभावित हैं, जिसमें कहा गया था कि कर्मचारी दिन में केवल ढाई घंटे ही उत्पादक रहते हैं।

5 दिन का सप्ताह भी कोई बहुत पुरानी चीज नहीं है। कार निर्माता हेनरी फोर्ड ने 1926 में अपने श्रमिकों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए उनको साप्ताहिक छुट्टी देना शुरू किया था। तकनीक के आने के गवाह रहे अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड कीन्स ने 1930 में संभावना जताई थी कि ऐसा समय आएगा जब लोग सप्ताह में सिर्फ 15 घंटे काम करेंगे।

करीब 100 साल बाद दुनियाभर के संगठन सप्ताह में काम के घंटों को फिर से निर्धारित कर रहे हैं। ग्रेट ब्रिटेन और आयरलैंड ने 4-दिवसीय कार्य सप्ताह में विशेष तौर पर रुचि दिखाई है। ब्रिटेन में ट्रेड यूनियन कांग्रेस, आयरलैंड में फोर्सा, स्कॉटलैंड की नेशनल पार्टी और ब्रिटेन की लेबर पार्टी अलग-अलग स्तरों पर इस पर विचार कर रही है।

स्वीडिश क्षेत्र में भी दिन और सप्ताह में काम के घंटे कम करने के प्रयोग हो रहे हैं, जिसके मिले-जुले परिणाम रहे हैं। काम के लंबे घंटों के लिए कुख्यात अमरीका में भी फास्ट फूड चेन शेक शैक ने इस साल मार्च में 4-दिवसीय सप्ताह का एलान किया। लेकिन काम के घंटे कम देना ही कामयाब हो जाने की गारंटी नहीं है। ऐसे सभी प्रयोग सफल नहीं रहे।
 

कामयाबी की गारंटी नहीं

स्वीडन में गुटेनबर्ग के सरकारी नर्सिंग होम्स में काम के घंटे घटाकर 6 करने का प्रयोग किया गया। इससे बीमारी की छुट्टियां कम हुई और उत्पादकता बढ़ी, लेकिन कर्मचारियों पर खर्च भी बढ़ गया, क्योंकि पहले से अधिक कर्मचारियों की जरूरत पड़ने लगी।

अमेरिका में चार दिन के सप्ताह का प्रयोग करने वाले कुछ स्टार्ट-अप्स को 5 दिवसीय सप्ताह में वापस लौटना पड़ा है, क्योंकि इससे कंपनी की प्रतिस्पर्धी क्षमता घट रही थी, जिससे कर्मचारियों का तनाव बढ़ रहा था।

वेर्सा की ब्लैकहैम और श्रॉवेन दोनों का मानना है कि लचीलापन महत्वपूर्ण है। ग्राहकों के जरूरी प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए दोनों ने ईस्टर के लंबे वीकेंड में लगातार काम किया। ब्लैकहैम और बार्न्स दोनों का कहना है कि दूसरी कंपनियों के प्रमुखों ने उनके 4-दिवसीय सप्ताह का समर्थन किया, लेकिन वे कहते हैं कि इसे अपने यहां लागू करना संभव नहीं है।

बार्न्स का कहना है कि कर्मचारियों को अपने समाधान तलाशने की छूट देना और उत्पादन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रेरित करना कामयाबी के लिए अहम हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com

सामाजिक पहलुओं को भी देखें

बार्न्स की कंपनी फिलहाल करीब 50 कंपनियों को सलाह दे रही है कि 4-दिवसीय सप्ताह कैसे लागू करें। उनका कहना है कि काम के घंटों में बदलाव से कई सामाजिक चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। "हमारे पांच में से एक कर्मचारी हर वक्त मानसिक तनाव से जूझते रहते हैं।" इसीलिए बार्न्स अपने कर्मचारियों और उनके परिवार की सेहत, बच्चों के साथ समय बिताने और उनकी शिक्षा को भी ध्यान में रखते हैं।

सिडनी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर रे कूप का कहना है कि 4-दिन का सप्ताह एक और अहम मुद्दे को सुलझाता है। वह है कुशल महिला कर्मचारियों का मुद्दा। वह कहती हैं, "ऑस्ट्रेलिया में औसत रूप से महिलाएं तीस के दशक में पहली बार मां बनती हैं। ये वो समय होता है जब हमारे करियर को लंबी छलांग मिलती है, आमदनी बढ़ती है और हम असल में बहुत उत्पादक कर्मचारी बनते हैं।"

"लेकिन इसी समय महिलाएं काम छोड़ देती हैं, क्योंकि हम उन्हें मां और उत्पादक श्रमिक दोनों बने रहने का विकल्प नहीं देते।" वेर्सा की ब्लैकहेम इसी को बदलने के लिए बेताब हैं। वो ये सुनिश्चित करना चाहती हैं कि उनकी बेटी करियर और पारिवारिक जीवन, दोनों को एक साथ निभा सके। वो कहती हैं, "किसी को लचीलेपन के लिए न लड़ना पड़े।"


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