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Operation Sindoor: 'ऑपरेशन सिंदूर' में किन-किन इस्राइली हथियारों का हुआ इस्तेमाल, इस पर क्या बोले नेतन्याहू?

Fri, 08 Aug 2025 07:35 AM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

इस्राइल भारत के सबसे बड़े हथियार और हथियार प्रणालियों के आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। इस व्यापार पर गाजा में जारी इस्राइली युद्ध का काफी हद तक कुछ भी असर नहीं पड़ा है।
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इस्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू - फोटो : ANI
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विस्तार
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बेंजामिन नेतन्याहू ने पहलगाम आतंकी हमले में पाकिस्तान की संलिप्तता के जवाब में सैन्य कार्रवाई के तौर पर चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत की ओर से इस्राइली हथियारों के इस्तेमाल की बात स्वीकार कर ली है। 'ऑपरेशन सिंदूर' में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के साथ संयुक्त रूप से विकसित बराक-8 मिसाइल और हार्पी ड्रोन जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।

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इस्राइली प्रधानमंत्री ने गुरुवार को हमास के खात्मे के लिए गाजा पर सैन्य हमले बढ़ाने की अपनी योजना का खुलासा करते हुए कहा, 'हमने पहले जो हथियार उपलब्ध कराए थे, वे जमीनी स्तर पर बहुत कारगर रहे। हम अपने हथियार जमीनी स्तर पर विकसित करते हैं। वे युद्ध के जांचे-परखे होते हैं।' उन्होंने आगे कहा, 'उन्होंने अच्छा काम किया और हमारे पास एक मजबूत आधार है।'

भारतीय सेना ने 7 मई से शुरू होकर लगभग 100 घंटे की अवधि में पाकिस्तानी मिसाइलों खदेड़ने के लिए बराक मिसाइलों और हार्पी ड्रोन के अलावा स्वदेशी हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल किया था। इस दौरान रूस निर्मित एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली का भी इस्तेमाल किया गया था।

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हार्पी ड्रोन
हार्पी ड्रोन इस्राइल द्वारा निर्मित मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) है, जिसे इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने विकसित किया है। यह एक लॉइटरिंग म्युनिशन है। जिसे मुख्य रूप से दुश्मन के रडार सिस्टम और हवाई रक्षा प्रणालियों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह ड्रोन निगरानी और सटीक हमले दोनों में सक्षम है, जो इसे सैन्य अभियानों में एक प्रभावी हथियार बनाता है। हार्पी ड्रोन का फायर एंड फॉरगेट मिसाइल भी कहा जाता है, क्योंकि हमला करने के बाद ये ड्रोन नष्ट हो जाता है। भारत ने इन्हें 2000 में इस्राइल से खरीदा था। 
  • लॉइटरिंग म्युनिशन (कामिकेज ड्रोन), जो लक्ष्य पर सीधे हमला करने के लिए खुद को नष्ट कर देता है।  ये ड्रोन अधिकतम 185 किमी/घंटा (115 मील/घंटा) गति से उड़ान भर सकता है। इस ड्रोन के अलग-अलग संस्करण 500 से लेकर 1000 किमी तक की दूरी तय कर सकते हैं। एक बार एयरबोर्न होने पर ये आसमान में करीब छह से नौ घंटे तक रह सकते हैं। ये ड्रोन अपने साथ 32 किलो तक हथियार लेकर उड़ सकते हैं।
  •  हार्पी ड्रोन हवा में लंबे समय तक मंडराने की क्षमता रखता है। यह किसी निर्धारित क्षेत्र में उड़ान भरता है, दुश्मन के रडार सिग्नल का पता लगाता है, और फिर स्वचालित रूप से या ऑपरेटर के आदेश पर लक्ष्य पर हमला करता है। यह ड्रोन अपने लक्ष्य पर गोता लगाकर हमला करता है और अपने विस्फोटक वारहेड के साथ खुद को नष्ट कर देता है, जिससे लक्ष्य को भारी नुकसान होता है।
  • हारोप (हार्पी का उन्नत संस्करण) निगरानी ड्रोन और घातक मिसाइल दोनों के रूप में कार्य करता है। यह लक्ष्य क्षेत्रों पर मंडराता है और फिर पता लगने पर लक्ष्य में गोता लगाता है, जिससे यह समय-संवेदनशील खतरों के खिलाफ अत्यधिक प्रभावी हो जाता है।

बराक 8 मिसाइलें
बराक-8 एक भारत-इस्राइल सहयोग से तैयार लंबी दूरी वाली सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है। बराक 8 को मध्यम दूरी के लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, एंटी शिप मिसाइल, ड्रोन के साथ-साथ क्रूज मिसाइलों और अन्य हवाई खतरे को नष्ट करने में सक्षम है। बराक 8 को संयुक्त रूप से इस्राइल की इस्राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (आईएआई) और भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया है। 
  • परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम लंबी दूरी की बराक 8 मिसाइल में तमाम खासियत हैं। इसमें अधिक उन्नत खोज की सुविधा और लंबी दूरी तक जाने की क्षमता है।
  • बराक-8 मिसाइल की मारक क्षमता 70 से 100 किमी तक है। यह बिना धुएं के आगे बढ़ती है।
  • साढ़े चार मीटर लंबी मिसाइल का वजन करीब तीन टन है और यह 70 किलोग्राम भार ले जाने में सक्षम है।
  • बराक-8 मिसाइल बहुउद्देशीय निगरानी और खतरे का पता लगाने वाली राडार प्रणाली से लैस है।
  • जहाज पर इसका इस्तेमाल एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के रूप में किया जाता है।
  • इसकी रफ्तार 2400 किमी प्रतिघंटा तक होती है। यह एक साथ कई लक्ष्यों को नेस्तनाबूद कर सकती है।
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भारत के लिए प्रमुख रक्षा आपूर्तिकर्ता
भारत ने पिछले एक दशक में इस्राइल से 2.9 अरब डॉलर के सैन्य उपकरण आयात किए हैं, जिनमें रडार, ड्रोन और मिसाइलें शामिल हैं। तेल अवीव ने दिल्ली को हथियारों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की है। इस्राइल पिछले एक दशक में भारत के लिए सैन्य उपकरणों का चौथा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। अन्य तीन देश रूस ($21.8 बिलियन), फ्रांस ($5.2 बिलियन) और अमेरिका ($4.5 बिलियन) हैं। हालांकि, भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत अपने हथियार निर्माण उद्योग को बढ़ावा देकर विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। रक्षा निर्यात 2015 के 1,940 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 23,622 करोड़ रुपये हो गया है, और इसी दौरान देश ने अपने पहले स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का भी अनावरण किया।
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