ईरान से बढ़ रहे तनाव के बीच अमेरिका दबाव की रणनीति अपनाते हुए मध्य पूर्व में युद्धपोत और ‘पैट्रियट एयर डिफेंस’ मिसाइल तंत्र तैनात करने जा रहा है। रक्षा विभाग, पेंटागन के मुताबिक यह कदम अमेरिकी सेना के खिलाफ ईरान के संभावित ऑपरेशन के खतरों को रोकने के लिए उठाया गया है।
पेंटागन ने बताया है कि यूएसएस आर्लिंगटन नामक युद्धपोत और पैट्रियट मिसाइल तंत्र मध्यपूर्व क्षेत्र में पहले से मौजूद यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक समूह और ए बी-52 बमवर्षक के साथ मौजूद रहेगा। बताया गया है कि यह तैनाती अमेरिकी हितों और सैन्यबलों के खिलाफ ईरानी हमलों की तैयारी के संकेतों के जबाव में की गई है।
हालांकि संचालन सुरक्षा के कारण सैन्यबलों की तैनाती का समय और स्थान नहीं बताया गया है। पेंटागन ने कहा है कि वह ईरानी सेना और सरकार की गतिविधियों पर करीब से नजर बनाए हुए है। साथ ही कहा कि अमेरिका ईरान से टकराव नहीं चाहता है लेकिन वह अपने हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के अध्यक्ष सीनेटर जिम इनहोफ ने पेंटागन के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि हमने ईरान को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह झुक जाए अथवा अमेरिका अडिग रहेगा।
ईरान की धमकियां और अमेरिकी दबाव की रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले साल ईरान के साथ हुई परमाणु संधि : 2015 से अलग हो गए थे। इस संधि के तहत ईरान ने संवेदनशील परमाणु गतिविधियों को सीमित करने पर सहमति जताई थी। वहीं ट्रंप ने ईरान के तेल निर्यात को खत्म करने के लिए कई प्रतिबंध लगा दिए। साथ ही पिछले माह ईरान से तेल खरीद रहे भारत, चीन समेत पांच देशों पर प्रतिबंध छूट हटाने की बात कही थी। ईरान के रेवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को आतंकवादी समूह घोषित कर दिया।
बुधवार को ईरान ने धमकी दी थी कि अगर यूरोप, चीन, रूस 60 दिनों के भीतर उस पर लगे प्रतिबंधों से राहत नहीं दिलाते हैं तो वह अपने यूरेनियम भंडारण में इजाफा करेगा। पिछले सप्ताह अमेरिकी सेंट्रल कमांड के जनरल केनिथ मैकिंजी ने ईरान सरकार के आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप लगाए थे। साथ ही उन्होंने कहा था कि ईरानी सरकार ने यमन में बैलेस्टिक मिसाइल भेजी हैं और उनके निर्माण व तैनाती में भी सहायता की है।