नेपाल सरकार के नेतृत्व में चल रहे इस अभियान से माझी गांव में बड़े बदलाव लाने में सफलता मिली है। स्थानीय नेता नथुनी प्रसाद कुशवाहा कहते हैं कि शुरुआत में अधिकांश लोग इस योजना के खिलाफ थे और मानते थे कि यह हमारी संस्कृति के विरुद्ध है, इसलिए हम अपने घरों के बाहर ही शौच करेंगे।
नथुनी प्रसाद कुशवाहा का कहना है कि खुले में शौच और बीमारी के बीच संबंध के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सामुदायिक समूह अब घर-घर जा रहे है।
साथ ही, शौचालयों के उपयोग और हाथ धोने जैसी अच्छी आदतों के स्वास्थ्य लाभों को लेकर भी लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। ग्रामीणों को स्वच्छता के लाभ और उनके जीवन पर इसके प्रभाव के बारे में शिक्षा दी गई, धीरे-धीरे बात उनकी समझ में आने लगी।
मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के रूप में राजू प्रसाद साह पर नगर पालिका में विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि खुले में शौच की समाप्ति के लिए तीन महीने के गहन प्रयासों के बाद माझी के हर घर ने अपना शौचालय बनाने का फैसला किया।
उनका कहना था, अब ये सभी लोग शौचालय का उपयोग कर रहे हैं, और ज़ाहिर है कि तब से अब में अंतर ये है कि अब बीमारियों में कमी आएगी और उनका जीवन स्तर सुधरेगा।
सुनयना के घर के पीछे एक शौचालय है। उनका कहना है, मैंने क़र्ज़ लेकर ख़ुद इसे बनाया था। मैंने अभी तक कर्ज़ पूरी तरह नहीं चुकाया है, लेकिन चावल की पैदावार से एक साल के भीतर इसका भुगतान कर दूंगी।