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व्हेल मछली के गीतों से महासागरों की पड़ताल संभव

Mon, 15 Feb 2021 06:28 AM IST
Kuldeep Singh न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, वाशिंगटन
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व्हेल - फोटो : सोशल मीडिया
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महासागरों की तल के नीचे क्या है? यह जानने के लिए वैज्ञानिक अब तक टेक्टोनिक प्लेट्स की भूकंप की गतिविधियों पर भी निर्भर रहे हैं, लेकिन व्हेल से जुड़ी एक नई खोज के लिए नए समाधान लेकर आई है। अमेरिका और चेक वैज्ञानिकों के अनुसार, व्हेल अपने गीतों के जरिए तल से 8,200 फीट नीचे बनी संरचनाओं की पड़ताल कर सकती हैं। उनके गीत एक प्रकार से भूकंपीय तरंगें पैदा करते हैं जो तल के नीचे मौजूद ज्वालामुखी चट्टानों व अन्य तमाम जानकारियां व्हेल देते हैं।

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इंस्टीट्यूट ऑफ जियोफिजिक्स ऑफ चेक एकेडमी ऑफ साइंस के वैज्ञानिक डॉ वाकलाव कुना और ऑरेगॉन के वैज्ञानिक जॉन नेबेलेक ने फिन व्हेल के गीतों के जरिए यह खोज की है। 60 हजार किलो वजनी और करीब 80 फीट लंबी फिन व्हेल को यह नाम इनकी पीठ पर मौजूद फिन की वजह से मिला। वह आपस में बात करती हैं तो 189 डेसीबल की आवाज में, बता दें कि किसी जेट हवाई जहाज का इंजन की आवाज भी अधिकतम 140 डेसीबल तक होती है।

फायदा? 
महासागरों को जानने में मदद
वैज्ञानिकों के अनुसार, महासागरों के तल के नीचे मौजूद संरचनाओं को जानने के लिए व्हेलों के गीत काम आ सकते हैं। यह एक प्रकार के जैविक उपकरण हैं। वैसे इन जानकारियों के लिए वैज्ञानिक भूकंप से पैदा तरंगों पर निर्भर हैं।
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व्हेल के गीतों का भारी डाटा पहले से दर्ज
महासागर के तल का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों के पास इन व्हेल के गीतों का खासा डाटा होता है। इस डाटा का उपयोग कर महासागर के तल की नई जानकारी आसानी से हासिल हो सकेगी। यह डाटा व रिकॉर्डिंग वैज्ञानिकों को मुफ्त मिल रही हैं।

फैक्ट्स: व्हेल के गीत
व्हेल के गीत दरअसल उनके संवाद का जरिया हैं। इन्हें सभी जानवरों में सबसे जटिल संवाद माना जाता है। हर व्हेल प्रजाति के समूह के एक दूसरे से अलग गीत होते हैं। 150 से 200 डेसीबल तक की तीव्रता वाले यह गीत बाकी प्राणियों को बहरा करने या मारने के लिए काफी हैं।

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