अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच यहां हुई शिखर वार्ता के सिर्फ दो ठोस नतीजे रहे। पहला यह रहा कि दोनों देश एक दूसरे के यहां राजदूतों की वापसी पर सहमत हो गए। दूसरा, यह कि दोनों देश परमाणु सुरक्षा के मुद्दे पर नए सिरे से बातचीत शुरू करने पर राजी हुए हैं। इन दोनों बातों का अर्थ है कि दोनों में बातचीत के तार आगे भी जुड़े रहेंगे। आगे वार्ता विशेषज्ञों के स्तर पर होगी।
एक गौर करने वाली बात यह रही कि दोनों राष्ट्रपतियों ने अपनी अलग-अलग प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि वे अपनी जनता और अपने देश के हितों की नुमाइंदगी करते हैं, इसलिए उन हितों की रक्षा करना उनका फर्ज है। इसका मतलब यह है कि जहां हितों के टकराव हैं, वहां वे एक दूसरे के प्रति सख्त होने में कोई कसर नहीं छोडेंगे। बाइडन ने जो कहा कि उसका निष्कर्ष यह कहा कि वे जिनेवा पुतिन को दोस्त बनाने नहीं आए थे, बल्कि इसका जायजा लेने आए थे कि पुतिन से बातचीत करके क्या हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रूस और अमेरिका के संबंध का मकसद दोनों देशों में भरोसा पैदा करना नहीं है। बल्कि यह अपने हित की रक्षा और उसकी पुष्टि के लिए है। साफ है, संबंधों को सामान्य बनाने की कसौटी पर बात ज्यादा आगे नहीं बढ़ी।
दोनों राष्ट्रपतियों ने अलग-अलग प्रेस कांफ्रेंस करने का फैसला किया। इसे भी इस बात का संकेत माना गया है कि उनके पास बताने के लिए ऐसी बातें ज्यादा नहीं थीं, जिन पर वे सहमति का एलान करते। पुतिन ने प्रेस कांफ्रेंस से दुनिया के सामने अपनी बात कहने के मौके का पूरा फायदा उठाया। इसमें रूस ने अमेरिका और पश्चिमी देशों समेत दुनिया भर के पत्रकारों को आमंत्रित किया। दूसरी तरफ बाइडन की प्रेस कांफ्रेंस में सिर्फ अमेरिकी पत्रकार बुलाए गए। पुतिन ने बिना टेलीप्रॉम्पटर के 55 मिनट तक पत्रकारों के हर तरह के सवाल के जवाब दिए। बाइडन ने पहले 11 मिनट तक टेलीप्रॉम्पटर के जरिए अपना वक्तव्य दिया। उसके बाद लगभग 20 मिनट उन अमेरिकी पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए, जिनकी सूची उन्हें पहले दी गई थी। प्रेस कांफ्रेंस के आखिर में उन्होंने सीएनएन की पत्रकार कैटलान कॉलिन्स से जिस चिढ़े अंदाज में बात की, उसकी खुद अमेरिका मीडिया में आलोचना हुई है।
अमेरिकी वेबसाइट द हिल.कॉम के टीकाकार जो कोंचा ने लिखा है- ‘फ्री वर्ल्ड के नेता ने फिर दिखाया कि वे बिना सूची के औचक पत्रकारों के सवाल आमंत्रित करने में अक्षम हैं। लेकिन 'हत्यारे ठग' पुतिन ने- जो अपने देश में मुक्त प्रेस की इजाजत नहीं देते, जिनेवा में बिना पूर्व तय क्रम के पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए।’
बाइडन ने प्रेस वार्ता में बताया कि उन्होंने पुतिन के सामने यह साफ कर दिया कि यह संभव नहीं है कि अमेरिका का कोई राष्ट्रपति बिना लोकतंत्र और मानव अधिकारों के मसले को उठाए बातचीत करे। इसलिए उन्होंने रूस में विपक्षियों के कथित दमन, बेलारूस के राष्ट्रपति को रूस के समर्थन और यूक्रेन के प्रति रूस के रुख को पुतिन के सामने उठाया। पुतिन ने यह नहीं बताया कि इन सवालों पर उन्होंने बाइडन को क्या जवाब दिया। लेकिन जब पत्रकारों ने इस बारे में प्रश्न पूछे तो उन्होंने उलटे अमेरिका के अपने रिकॉर्ड की चर्चा शुरू कर दी। उन्होंने इशारों में ब्लैक नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या और कैपिटॉल हिल (अमेरिकी संसद भवन) पर हमले के बाद विपक्ष समर्थकों पर चल रहे मुकदमों का जिक्र किया।
साइबर हमलों से लेकर लोकतंत्र के दमन जैसे मसलों पर पुतिन ने अपने देश की बात कम और इन मुद्दों पर अमेरिका के रिकॉर्ड की चर्चा ज्यादा की। कुल संदेश यह रहा कि पुतिन ने प्रेस कांफ्रेंस को अपने पीआर (जन संपर्क) का मौका बनाया। उधर बाइडन का ध्यान अपने देश की जनता को संबोधित करने पर टिका रहा।