अब रूस में बनी कोरोना वैक्सीन स्पूतनिक वी की कई देशों को महंगे दामों पर की गई बिक्री का एक कथित घोटाला सामने आया है। यहां के अखबार द मास्को टाइम्स ने अपनी एक खोजी रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि गरीब देशों को वैक्सीन देने के लिए हुए करार के तहत जिन वैक्सीन डोज की सप्लाई हुई, उसे दुबई के एक शाही परिवार से जुड़ी कंपनी ने दो गुने दाम पर बेच दिया।
द मास्को टाइम्स ने ध्यान दिलाया है कि जब कोरोना वायरस संक्रमण रोकने के लिए सबसे पहले वैक्सीन के रूप में स्पुतनिक वी बनी, तो रूस ने उसे ‘पूरी मानवता की वैक्सीन’ बताया था। उसे विकासशील देशों को आपूर्ति करने की कई घोषणाएं रूस ने की। लेकिन इस अखबार की पड़ताल से सामने आया है कि बहुत से देशों को ये वैक्सीन हासिल करने के लिए यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) के शाही परिवार के एक सदस्य और वहां की बिचौलिया कंपनी से सौदा करना पड़ा। जिन देशों को इस कारण ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी, उनमें पाकिस्तान से लेकर गुयाना तक शामिल हैं।
यूएई स्थित बिचौलियों ने खुद को स्पुतनिक वी के आधिकारिक विक्रेता के रूप में पेश किया। उन्होंने इस वैक्सीन को उससे दो गुना ज्यादा कीमत पर बेचा, जिसका विज्ञापन रूस ने किया था। द मास्को टाइम्स ने कहा है कि इस मसले के सामने आने से ये सारा सौदा विवादास्पद हो गया है। इससे रूस की छवि पर बहुत खराब असर पड़ने का अंदेशा है।
अखबार के मुताबिक कथित घोटाले की जड़ में रूस के रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ) और अबू धाबी स्थित औरुगल्फ हेल्थ इन्वेस्टमेंट कंपनी के बीच हुआ करार है। इस कंपनी का संबंध एक अमीराती शाही परिवार से है। इसकी स्थापना पिछले साल से आखिर में हुई थी। आरडीआईएफ ने औरुगल्फ कंपनी को स्पुतनिक वी की दुनिया भर में बिक्री और वितरण संबंधी खास अधिकार दे दिए। दुबई के शाही परिवार से जुड़े शेख अहमद दालमूक अल मखतूम की इस करार के पीछे मुख्य भूमिका रही।
स्पुतनिक वी के बारे में रूस, मखतूम और यूएई के संबंधों पर सबसे पहले रोशनी नॉर्वे की एक संस्था ने पिछले महीने डाली थी। द मास्को टाइम्स ने उसके बाद अपनी पड़ताल शुरू की। इससे सामने आया कि दुनिया के सबसे जरूरतमंद देशों को इस वैक्सीन की सप्लाई के बारे में आरआईडीएफ, अल मखतूम और औरुगल्फ कंपनी के बीच रिश्ता काफी गहरा रहा है। द मास्को टाइम्स के मुताबिक उसने आरडीआईएफ और अबू धाबी की कंपनी की प्रतिक्रिया जानने की कोशिश की। लेकिन उसके अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया गया।
द मास्को टाइम्स ने कहा है कि रूस ने स्पुतनिक वी की बिक्री के लिए स्लोवाकिया और हंगरी के साथ अलग से समझौते किए। उन देशों को वैक्सीन की बिक्री क्रमशः 9.95 डॉलर प्रति डोज के हिसाब से की गई। यानी उन देशों को वैक्सीन के दो डोज के लिए 19.90 डॉलर चुकाने पड़े। लेकिन औरुगल्फ कंपनी ने घाना सरकार से दो डोज की कीमत 24 डॉलर और गयाना से 22.50 डालर वसूली। पाकिस्तान की निजी कंपनी एजीपी से भी दो डोज के लिए 22.50 डालर की कीमत ली गई।