चीन में 'मी-टू' आंदोलन को बड़ी कामयाबी मिली है। देश में 2018 में 'मी-टू' आंदोलन के बाद कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए बनाए गए विशेष कानून के खिलाफ पहली सुनवाई शुरू हो गई है। इस मामले में आरोपी एक मशहूर मीडिया शख्सियत है। इस मामले में आरोप लगाने वाली झाऊ शियाशुआन ने मुकदमा शुरू होने को चीन के इतिहास का एक बड़ा क्षण बताया है। सत्ताइस वर्षीया झाऊ ने 2018 में जाने माने टीवी एंकर झू जुन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जब वे सरकारी टीवी चैनल सीसीटीवी में इंटर्न थीं, तब झाऊ ने उनका जबरन चुंबन लिया।
चीन का नया कानून इसी साल मई में पारित हुआ। इसके तहत यौन उत्पीड़न की परिभाषा को विस्तृत कर दिया गया। लेकिन अभी भी चीन में बहुत सी महिलाएं यौन उत्पीड़न के मामलों में सामने आने को तैयार नहीं होतीं। इसीलिए कोर्ट में शुरू हुई इस मामले की सुनवाई को बहुत अहमियत दी जा रही है। झाऊ शियाशुआन ने बुधवार को एक समाचार एजेंसी से कहा- मैं बहुत नर्वस हूं। लेकिन हम हारें या जीतें, इस केस का एक खास मतलब है। अगर हम केस हार भी गए तब भी मैंने जो सवाल उठाए हैं, वे इतिहास में दर्ज रहेंगे। किसी न किसी को तो उसका जवाब देना होगा।
बुधवार को सुनवाई शुरू हुई तो हाइदियान पीपुल्स कोर्ट के बाहर बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गई। चीन में इसे राजनीतिक सक्रियता का एक बड़ा मामला समझा गया है। वहां मौजूद लोग झाऊ के प्रति अपना समर्थन जता रहे थे और मांग कर रहे थे कि इस मामले में उठे सवालों के जवाब दिए जाएं। लेकिन वहां पुलिस ने लोगों से प्लेकार्ड ना दिखाने को कहा। कुछ खबरों के मुताबिक पुलिस ने जबरन वहां लगाए प्लेकार्ड्स को हटा दिया।
झाऊ ने उम्मीद जताई है कि ये केस चीन की कानूनी व्यवस्था में एक प्रगति साबित होगा। झाऊ का इल्जाम है कि 2014 में वे ड्रेसिंग रूम में झू के साथ अकेली रह गई थीं। तब झाऊ ने उनसे पूछा कि क्या तुम इस चैनल में आगे भी काम करना चाहती हो। जब झाऊ ने हां कहा, तो झाऊ ने उन्हें जकड़ लिया।
झाऊ चीन के सालाना वसंत उत्सव कार्यक्रम के भी होस्ट रह चुके हैं। ये शो दुनिया में सर्वाधिक दर्शक जुटाने वाले टेलीविजन कार्यक्रमों में एक है। वे देश के दूसरे महत्वपूर्ण प्रसारणों से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने झाऊ पर उल्टा मानहानि का केस कर दिया है।
शुरुआत में झाऊ के खिलाफ केस व्यक्तिगत अधिकार कानून के तहत दर्ज हुआ था। इस कानून में व्यक्तियों की सेहत और शरीर की रक्षा का प्रावधान है। लेकिन जब मई में नया कानून बना, तो उनके वकीलों ने इसके तहत मामले की सुनवाई की अर्जी दी।
2018 में दुनिया भर में मी-टू आंदोलन के तहत अनगिनत महिलाएं सामने आई थीं और अतीत में हुए उनके साथ हुए यौन उत्पीड़न के मामलों का खुलासा किया था। झाऊ भी तभी सामने आई थीं। मी-टू आंदोलन चीन में काफी जोरशोर से चला था। झाऊ के मुताबिक जब वे मामला दर्ज कराने गई तो पुलिसकर्मियों ने उनसे कहा था कि इससे सरकारी टीवी चैनल की छवि खराब होगी। साथ ही झाऊ के प्रशंसकों की भावनाएं आहत होंगी। झाऊ के मुताबिक पुलिस वालों ने ये अहसास कराने की कोशिश की कि उनके साथ जो हुआ, वो कोई खास बात नहीं है।
जानकारों के मुताबिक ऐसे ही नजरिए के कारण चीन के रूढ़िवादी समाज में ज्यादातर महिलाएं अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज नहीं करातीं। झाऊ का कहना है कि अगर वे केस हार गईं, तब भी उन्हें आशा है कि उनके मामले से दूसरी महिलाओं को आगे आने का मौका मिलेगा।