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पाकिस्तान में खोला गया ऐतिहासिक चोआ साहिब गुरुद्वारा, 72 सालों से बंद पड़ा था पवित्र स्थल

Sat, 03 Aug 2019 04:21 AM IST
Nilesh Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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चोआ साहिब गुरुद्वारा - फोटो : चोआ साहिब गुरुद्वारा
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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में शुक्रवार को ऐतिहासिक गुरुद्वारे चोआ साहिब के दरवाजे खोल दिए गए। विभाजन के बाद से बंद इस गुरुद्वारे को खोलते वक्त भारत के सिख श्रद्धालु भी शामिल थे। गुरु नानक देव की नवंबर में होने वाली 550वीं जयंती के अवसर पर इस गुरुद्वारे को खोला गया है। सिख समुदाय के लोग इसे खोलने की लंबे समय से मांग कर रहे थे।

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रिपोर्ट के मुताबिक, 1947 में सिख समुदाय के लोगों के यहां से बड़ी संख्या में चले जाने के बाद से गुरुद्वारा बंद था। इसके बाद से झेलम जिले में स्थित इस गुरुद्वारे की उपेक्षा होती रही। यूनेस्को विश्व विरासत स्थल रोहतास किले के करीब स्थित इस गुरुद्वारे को उच्च अधिकारियों और सिख समुदाय के लोगों की उपस्थिति में खोला गया। इस दौरान यहां कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। गुरुद्वारा खोलने की प्रक्रिया अरदास और कीर्तन से शुरू हुई।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के पवित्र स्थलों की देखभाल करने वाली संस्था इवैक्यू ट्रस्ट प्रोपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) के अध्यक्ष डॉ. आमेर अहमद इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे। इस अवसर पर पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (पीएसजीपीसी) के अध्यक्ष सरदार सतवंत सिंह भी उपस्थित थे।
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ईटीपीबी के प्रवक्ता आमिर हाशमी ने कहा, गुरुद्वारा चोआ साहिब को दर्शन के लिए खोल दिया गया है। यह विदेशी सिखों के लिए भी खोला गया है, चाहे वे भारत से आए हों या दुनिया के किसी अन्य हिस्से से। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारे का जीर्णोद्धार का काम चल रहा है।

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महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाया

महाराजा रणजीत सिंह ने इस गुरुद्वारे को बनवाने का काम शुरू किया था। गुरुद्वारा 1834 में बनकर पूरा हुआ। माना जाता है कि सिखों के पहले गुरु नानक देव इस स्थान पर ठहरे थे। वह जोगियान मंदिर से लौट रहे थे। यह जगह तब सूखे से जूझ रही थी। कहा जाता है कि तब गुरु नानक देव ने यहां अपने बेंत से जमीन पर मारा और एक पत्थर फेंका, जिसके बाद यहां प्राकृतिक झरने (चोहा) का पता चला।
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