दुनिया भर में लाखों लोगों को संक्रमित कर चुका कोरोना वायरस इन शिविरों में फैल कर विध्वंस गति से फैल सकता है और अनेक लोगों की जान ले सकता है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के पब्लिक हेल्थ रिसर्चर एडम कोट्स कहते हैं, हम यह सोचते हैं कि कोरोना वायरस अमेरिका और यूरोप में बड़ा मुद्दा है, मगर हमें पता नहीं है कि यदि कोविड-19 शरणार्थी आबादी में फैल गया तो क्या होगा।
कम लोगों की हो रही जांच
अभी तक शरणार्थियों में कोरोना वायरस की पुष्टि के मामले कम हैं, लेकिन इसके पीछे कम जांच भी कारण है। यहां जांच बेहद सीमित है और शरणार्थी तो शायद ही प्राथमिकता में हों। सीरिया और बांग्लादेश में शरणार्थियों का इलाज करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि हाल के हफ्तों में उन्होंने इस वायरस के लक्षण वाले मरीजों का इलाज किया है। कोट्स कहते हैं कि यह सोचना बचकाना है कि यह संक्रमण शरणार्थी और विस्थापित आबादी में नहीं फैला है।
वायरस से निपटने में अक्षम ये शिविर
यदि यहां वायरस मौजूद है, तो ये शिविर इससे निपटने में भयावह तरीके से अक्षम हैं। अनेक शिविर तो पहले ही डेंगू और हैजा के प्रकोपों से जूझ रहे हैं। वहां मधुमेह और दिल की बीमारियों के संसाधन तक नहीं हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि कोरोना वायरस यहां तबाही ला सकता है, जिसका अभी तक कोई इलाज नहीं ढूंढ़ा जा सका है। दुनिया भर में शरणार्थियों की मदद के लिए अपनी टीमें तैनात करने वाले डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के कार्यकारी निदेशक एवरिल बेनोइट कहते हैं कि हम सबसे बुरी स्थिति के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं।
उत्तरपूर्वी नाइजीरिया के बकास्सी कैंप के अधिकांश लोग बोको हराम के चंगुल से भागकर यहां आए हैं। उनके कम्युनिटी नेता अहमादु यूसुफ कहते हैं, यदि वायरस यहां आ गया तो यह बहुत बड़ी तबाही होगी। यहां के विद्रोह ने जितनी तबाही नहीं मचाई उससे अधिक तबाही यहां होगी। लेबनान में अधिकांश सीरियाई शरणार्थी शहरों में रहते हैं।
यहां पैंतीस बरस की निसरीन मुहरा कहती है कि उसके बच्चे बेरुत की सड़कों पर टिश्यू बेचते थे, लेकिन हमें घरों में रहने को मजबूर किया गया है। उसके पति दैनिक मजदूर हैं और जान जोखिम में डालकर काम पर जा रहे थे, लेकिन सैनिकों ने उन्हें पकड़ लिया।
यह परिवार तीन महीने से घर का किराया नहीं दे पाया है और सिर्फ तेल, ब्रेड और कुछ शाक के भरोसे है। उनके पास नकदी नहीं है, जिससे वे सैनेटाइजर खरीद सकें। वह कहती है, ‘मास्क खरीदने से बेहतर है कि मैं अपने बच्चों के लिए ब्रेड खरीद लूं। हम कोरोना से नहीं, भोजन की कमी से मारे जाएंगे।’