श्रीलंका में बिगड़ते हालात की खबरों से नेपाल में चिंता गहराती जा रही है। यहां विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नेपाल भी आर्थिक संकट की तरफ बढ़ रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक व्यापार घाटा बढ़ने और आर्थिक गतिविधियां धीमी होने का असर अब नेपाल के राजकोष पर साफ दिखने लगा है। नेपाल अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। दुनिया में ईंधन और खास वस्तुओं की बढ़ी महंगाई के कारण देश का आयात बिल बढ़ता जा रहा है।
कस्टम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बैशाख (अप्रैल के मध्य से मई के मध्य तक) 44 अरब रुपये वसूलने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन असल वसूली 29 अरब रुपये की ही हो सकी। विभाग के प्रवक्ता पुण्य बिक्रम खड़का ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा कि वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में कस्टम वसूली लक्ष्य से अधिक हो रही थी। लेकिन उसके बाद खुद सरकार ने आयात घटाने की नीति अपना ली। उसका असर हुआ है। दिसंबर के मध्य से ही आयात में गिरावट आने लगी। खड़का ने स्वीकार किया कि वित्त वर्ष में कस्टम वसूली तय लक्ष्य से काफी कम रहेगी।
यूक्रेन संकट के बाद बने हालात में पिछले महीने नेपाल सरकार ने कई तरह की वस्तुओं के आयात पर पूरी रोक लगा दी। इनमें रेडीमेड वस्त्र, शराब, सिगरेट और तैयार तंबाकू उत्पाद, लेज के पोटैटो चिप्स और कुरकरे सहित कई तरह के स्नैक्स आदि शामिल हैं। इनके अलावा हीरे के आयात पर भी रोक लगा दी गई है। अब सिर्फ उन डायमंड्स के आयात की इजाजत है, जिनका औद्योगिक कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होता है। शेर बहादुर देउबा सरकार ने 50 हजार रुपये से ज्यादा दाम वाले मोबाइल फोन और 32 इंच स्क्रीन से ज्यादा के टीवी सेट के आयात पर भी रोक लगा दी है।
काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट में बताया है कि न सिर्फ कस्टम ड्यूटी की वसूली घटी है, बल्कि देश के अंदर की आर्थिक गतिविधियों से प्राप्त होने वाले राजस्व में भी गिरावट आई है। इससे अर्थशास्त्री चिंता में हैं। उन्होंने कहा है कि अगर ये रूझान जारी रहा, तो आयात घटाने के बावजूद देश आर्थिक संकट में फंस जाएगा।