कोरोना वायरस के कारण देश के अधिकतर स्कूल के करीब आठ महीने से बंद हैं। लंबे समय बाद स्कूल खुलने पर अगर पानी की टंकियों के साथ बाथरूम आदि की सफाई अच्छे से नहीं होती है तो उनमें पनपा लेजिओनेला बैक्टीरिया बच्चों और स्टाफ के लिए घातक हो सकता है। अमेरिका के नौ स्कूलों में यह मिल चुका है।
लखनऊ के आरएमएल आयुर्विज्ञान संस्थान के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के बैक्टीरीयोलॉजिस्ट डॉक्टर मनोदीप सेन बताते हैं कि स्कूल की पानी की टंकियां, वॉशरूम या फव्वारे के पानी में इसके पनपने की संभावना अधिक होती है। चिंता की बात यह है कि यह बैक्टीरिया अभी कोरोना वायरस की तरह फैल लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है। जिससे उन्हें तकलीफ न होने का इन्फेक्शन की पहचान के लिए स्पेशल कल्चर से ही इसकी पुष्टि की जा सकती है।
पानी के साथ शरीर में आ सकता है बैक्टीरिया
डॉ. मनोदीप बताते हैं कि लेजिओनेला बैक्टीरिया होते हैं जो सांस संबंधी तकलीफ को जन्म देते हैं। जैसे ही पानी का नल या सॉवर को ऑन किया जाएगा। भीतर बैठा बैक्टीरिया पानी के साथ शरीर के भीतर दाखिल हो जाएगा। बड़े बच्चों और वयस्कों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर ज्यादा बुरा असर दिख सकता है। हालांकि छोटे बच्चों को इसमें खतरा कम है।
अमेरिका के स्कूलों में शून्य हुआ क्लोरीन स्तर
अमेरिका में जब स्कूलों को खोलने की कवायद शुरू हुई तो कुछ स्कूलों ने पानी की जांच की मिल्टन यूनियन हाई स्कूल में दो बार पानी की जांच हुई तो क्लोरीन का स्तर शून्य पाया गया। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने पानी की विस्तृत जांच कराई तो उसमें लेजिओनेला बैक्टीरिया की मौजूदगी की पुष्टि हुई। वैज्ञानिकों का कहना है कि बैक्टीरिया युक्त पानी को बिना जांच के पहचानना मुश्किल है। ऐसे में सावधानी जरूरी है।
ऐसे किया जा सकता है बचाव-
- बच्चे स्कूल कॉलेज आ जाते हैं तो पीने का पानी घर से लेकर जाएं।
- शौचालय काफिला जब आते वक्त मास्क पहन कर रखें।
- स्कूल प्रशासन शौचालय की साफ सफाई का ध्यान रखें।
- टंकियों और पानी के स्रोतों की बिना अच्छे से सफाई किए चालू नहीं किया जाए।
- परिसर में ऐसे स्थल जहां पानी जमा रहता है या वहां से आपूर्ति होती है वहां किसी को न जाने दिया जाए।