चीन की पीपुल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कमेटी का सम्मेलन गुरुवार और नेशनल पीपुल्स कांग्रेस का अधिवेशन शुक्रवार को शुरू होगा। ये दोनों वार्षिक बैठकें चीन में राजनीतिक विचार-विमर्श का सबसे बड़ा मौका होती हैं। लेकिन इस बार के सम्मेलनों पर खास नजर है, क्योंकि इनमें चीन की अगली पंचवर्षीय योजना को मंजूरी दी जाएगी। इस योजना का मसविदा पिछले दिसंबर में जारी किया गया था। उस पर आई टिप्पणियों और सुझावों को शामिल करते हुए इसका नया प्रारूप पीपुल्स कांग्रेस में रखा जाएगा।
जानकारों के मुताबिक अगली पंचवर्षीय में सबसे अहम बात तकनीक और आविष्कार के लिए तय किए जाने वाले लक्ष्य हैं। इन क्षेत्रों के लिए कितना बजट तय होता है, उससे संकेत मिलेगा कि चीन ने कितनी ऊंची तकनीकी महत्वाकांक्षाएं तय की हैं। इस सिलसिले में ध्यान दिलाया गया है कि इन क्षेत्रों पर जितना खर्च करने का लक्ष्य पिछली पंचवर्षीय योजना में तय किया गया था, वह पूरा नहीं हो सका। तब चीन की पीपुल्स कांग्रेस ने जीडीपी के 2.5 फीसदी हिस्से को तकनीक के आविष्कार और विकास पर खर्च करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन असल खर्च 2.4 फीसदी ही हुआ।
कनाडा की ओटावा यूनिवर्सिटी के विज्ञान, समाज और नीति संस्थान में सीनियर फेलो मार्गरेट मैककुइग-जॉनसन ने हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि अगर चीन आविष्कार की प्रतिस्पर्धा में बने रहना चाहता है, तो उसे नई पंचवर्षीय योजना में अधिक आक्रामक रुख अपनाना पड़ेगा। गौरतलब है कि अमेरिका के पॉलसन इंस्टीट्यूट से संबंधित थिंक टैंक मार्को पोलो ने अनुमान लगाया है कि चीन का तकनीक इकोसिस्टम गतिशीलता, आविष्कार और प्रतिस्पर्धा क्षमता के मामले में 2025 तक सिलिकॉन वैली की बराबरी कर लेगा। लेकिन यहां विशेषज्ञों का कहना है कि यह तभी संभव है, अगर उसके लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान चीन सरकार करे। गौरतलब है कि मार्को पोलो के एक अध्ययन में तकनीक क्षेत्र की महाशक्ति के रूप में चीन की स्थिति को कमजोर बुनियाद पर टिका माना है।
इंग्लैंड की नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के आविष्कार अध्ययन विभाग के प्रोफेसर काओ कोंग ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा कि नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की बैठक के बाद चीन की तकनीक संबंधी रणनीति की एक झलक मिलेगी। लेकिन इसका दीर्घकालिक ब्योरा इस साल बाद में जारी होगा। इसलिए उसे देखने के बाद ही चीन की संभावनाओं के बारे में कोई ठोस अनुमान लगाया जा सकेगा। चीन की पंचवर्षीय योजना के प्रारूप में विज्ञान एवं तकनीक से संबंधित राष्ट्रीय रणनीतिक फोर्स को मजबूत करने और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं का एक नया स्तर निर्मित करने की बातें शामिल हैं। काओ कोंग ने कहा कि इन प्रस्तावों को चीन की विज्ञान और तकनीक के विकास की दीर्घकालिक योजना के संदर्भ में देखना चाहिए। यह योजना 2035 तक के लिए है।
चीन के सामने अब एक नई चुनौती अमेरिका और यूरोप के साथ उसके बिगड़ते संबंधों के कारण आई है। जानकारों का कहना है कि अगर ये रुझान जारी रहा, तो चीन के लिए विदेशी विज्ञान और तकनीक तक पहुंच बनाना मुश्किल हो जाएगा। तब उसे अपने ही वैज्ञानिकों पर निर्भर रहना होगा। उस स्थिति में खर्च बढ़ेगा। इसीलिए ये देखना अहम है कि नेशनल पीपुल्स कांग्रेस इस क्षेत्र के लिए कितना बजट मंजूर करती है।
थिंक टैंक मार्को पोलो में फेलॉ मैट शीहान ने चीन की पंचवर्षीय योजना का मसविदा जारी होने के बाद तकनीक संबंधी एक जायजे में लिखा था कि चीन अब अनुसंधान पर ज्यादा जोर देने की तरफ जा रहा है। तकनीक को बाजार में उतारने का लक्ष्य तय करने के बजाय उसका जोर अनुसंधान क्षेत्र में अपनी कमजोरियां दूर करने पर है। पिकिंग यूनिवर्सिटी के रिसर्चर झेंग शिलिन ने एक टिप्पणी में लिखा है कि चीन 2023 तक फंडिंग, अनुसंधानकर्ताओं की संख्या और पेटेंट आवेदनों के मामले में बाकी देशों से आगे निकल जाएगा। लेकिन उसके लिए आविष्कार और विकास पर जीडीपी के हिस्से के अनुपात में विकसित देशों के बराबर खर्च करना संभव नहीं है। इस मामले में वह 2035 तक अमेरिका के साल 2000 के स्तर तक भी नहीं पहुंच पाएगा।
इसीलिए बहुत से जानकार यह नहीं मानते कि चीन तकनीक के मामले में निर्णायक बढ़त बनाने की स्थिति में पहुंच गया है। और इसीलिए इस ओर सबकी निगाहें टिकी हैं कि नेशनल पीपुल्स कांग्रेस इस मामले में क्या संदेश देती है।