कुछ दिन पहले ये खबर आई कि 2020 में चीन में जन्म दर रिकॉर्ड स्तर तक गिर गई है। इसमें निकट भविष्य में बढ़ोतरी की कोई संभावना भी नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब जनसंख्या के मोर्चे पर चीन को कई प्रकार की समस्याओं से उलझना पड़ रहा है। उससे उसकी मुश्किलें बढ़ रही हैं।
ताजा आंकड़े सामने आने के बाद जनसंख्या विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि चीन की कुल आबादी में गिरावट उससे पहले ही आने लगेगी, जिसका पहले अनुमान लगाया गया था। पिकिंग यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर जेम्स लियांग ने अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से कहा- ‘हमारी शुरुआती भविष्य़वाणी यह है कि 2021 में एक करोड़ के आसपास या उससे भी कम शिशुओं का जन्म होगा। उसके साथ ही चीन के लिए सबसे बड़ी खबर यह आएगी कि उसकी कुल जनसंख्या में गिरावट आने लगी है।’
ग्वांगजाऊ स्थित चीन के जाने-माने जनसंख्या विशेषज्ञ हे याफू ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि 2021 में चीन की आबादी में गिरावट शुरू हो जाने की संभावना है। हे ने इस साल मई में अनुमान लगाया था कि आबादी में गिरावट की शुरुआत 2022 में होगी। लेकिन ताजा आंकड़े जारी होने के बाद उन्होंने कहा है कि अब इसी वर्ष ऐसा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में जन्म दर में नाटकीय ढंग से गिरावट आई है। इसलिए चीन की आबादी में गिरावट तेजी से होने की संभावना है। इससे चीन में कई तरह की सामाजिक समस्याएं पैदा होंगी और इसका गहरा आर्थिक प्रभाव भी होगा। कई दूसरे औद्योगिक देश भी आबादी घटने की समस्या से जूझ रहे हैं। लेकिन वहां ये समस्या आर्थिक विकास का एक खास स्तर हासिल करने बाद सामने आई। चीन अभी भी उन देशों के बराबर विकास का स्तर हासिल नहीं कर पाया है। साथ ही सामाजिक सुरक्षा का उसका ढांचा भी अपेक्षाकृत कमजोर है।
चीन में पिछले साल प्रजनन दर (रिप्लेसमेंट रेट) 1.3 रही। जापान में ये दर 1.34 थी। जबकि चीन का प्रति व्यक्ति जीडीपी जापान की तुलना में लगभग एक चौथाई ही है। वैसे सिंगापुर और दक्षिण कोरिया में प्रजनन दर चीन से भी नीचे है। वहां ये दर क्रमशः 1.1 और 0.84 हो चुकी है।