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क्या बाइडन तोड़ पाएंगे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की दादागिरी?

Fri, 27 Nov 2020 03:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

ऐसी चर्चा है कि बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका ‘एशिया की धुरी’ रणनीति को फिर से आगे बढ़ा सकता है। चीन की बढ़ती ताकत को नियंत्रित रखने के लिए ये रणनीति पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर में बनाई गई थी...
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Joe Biden and Xi Jinping - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने दो रोज पहले कहा था कि राष्ट्रपति पद संभालने के बाद वे अमेरिका को फिर से दुनिया का नेता बनाएंगे। इस क्रम में वे एशिया- प्रशांत क्षेत्र के साथ अमेरिका के संबंधों को मजबूत करेंगे। इसके जवाब में शुक्रवार को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संघ (आसियान) के लिए एक पहले से रिकॉर्ड किया गया वीडियो संदेश जारी किया। इस शी ने संकल्प जताया कि चीन इस क्षेत्र के साथ अपने संबंधों को और गहरा बनाएगा। साथ ही वह दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ चीन को जोड़ने वाले “डिजिटल सिल्क रोड” का निर्माण करेगा।

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इस इलाके के दस देश आसियान के सदस्य हैं। शी ने कहा कि कोरोना महामारी आने के बाद इस क्षेत्र में अकेला देश जिसकी अर्थव्यवस्था बढ़ोतरी की राह पर है, वह चीन है। चीन इस क्षेत्र के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को खोलना जारी रखेगा, ताकि उसके विकास का लाभ इस पूरे क्षेत्र को मिल सके। शी ने कहा कि चीन बाहरी दुनिया के लिए अपने दरवाजे खोलने के रास्ते पर अडिग रहेगा। वह अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था के साथ अंतरराष्ट्रीय संबंधों को और मजबूत बनाएगा।


शी का ये वीडियो अभी चल रहे चीन-आसियान एक्सपो में जारी किया गया। ये व्यापार प्रदर्शनी चीन के शहर नानिंग में चल रही है। यह पहला मौका है कि जब चीन के राष्ट्रपति ने ऐसी प्रदर्शनी के लिए विशेष संदेश जारी किया है। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसा अमेरिका की संभावित पहल का जवाब देने के लिए किया गया है।
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अभी एशिया-प्रशांत क्षेत्र को चीन कितनी तरजीह दे रहा है, इसका संकेत चीन के विदेश मंत्री वांग यी की ताजा जापान और दक्षिण कोरिया की यात्राएं भी हैं। वांग ने शुक्रवार को  अपनी यह यात्रा पूरी की। दोनों देशों में उन्होंने वादा किया कि कोरोना महामारी से त्रस्त दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं की मदद करने की चीन पूरी कोशिश करेगा।

वांग की दक्षिण कोरिया यात्रा के दौरान इस बात पर भी सहमति बनी कि दोनों देश उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ठहरी वार्ता को फिर से शुरू कराने के लिए सहयोग करेंगे। दक्षिण कोरिया से चीन के संबंध अतीत में मधुर नहीं रहे हैं। लेकिन अब दक्षिण कोरिया भी चीन के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश में नजर आ रहा है।

कुछ रोज पहले ही चीन ने क्षत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) करार पर दस्तखत किए। उसमें आसियान के सदस्य सभी देश शामिल हैं। उनके अलावा जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी उस समझौते में शामिल हुए हैँ। आसियान के दस सदस्य देशों में ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलिपीन्स, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं। आरसीईपी दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार समझौता है।

ऐसी चर्चा है कि बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका ‘एशिया की धुरी’ रणनीति को फिर से आगे बढ़ा सकता है। चीन की बढ़ती ताकत को नियंत्रित रखने के लिए ये रणनीति पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौर में बनाई गई थी। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद इस क्षेत्र में अमेरिकी भूमिका बहुत घटा दी। विश्लेषकों का मानना है कि उससे चीन को यहां खुला मैदान मिल गया और उसने इसका पूरा लाभ उठाया है।

कोरोना महामारी को जल्द संभालने के बाद चीन ने अपनी अर्थव्यवस्था को महामारी के कारण लगे झटके से काफी हद तक उबार लिया है। जिस समय अमेरिका और दुनिया के बाकी बड़े देश महामारी को संभालने में फंसे हुए हैं, चीन एशिया- प्रशांत क्षेत्र में अपनी व्यापारिक भूमिका को तेजी से बढ़ा रहा है।

इस साल वह आसियान का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार बन गया। इस साल तक यूरोपियन यूनियन आसियान का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार था। पिछले साल तक यह दर्जा अमेरिका को हासिल था। लेकिन अब चीन ने इसे हासिल कर लिया है।

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